महत्व
देवशयनी एकादशी (आषाढ़ी एकादशी) वह दिन है जब भगवान विष्णु शेषनाग पर चार माह की योगनिद्रा में जाते हैं। इससे चातुर्मास — तप एवं भक्ति का काल — आरंभ होता है।
महाराष्ट्र में यह पंढरपुर वारी यात्रा की परिणति है।
विधि
भक्त उपवास एवं जागरण कर विष्णु की पूजा करते हैं। चातुर्मास में विवाह आदि शुभ कार्य टाले जाते हैं, जबकि साधना, व्रत एवं दान बढ़ते हैं। विठ्ठल भक्त पंढरपुर पहुँचते हैं।
तिथि कैसे तय होती है
यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी को पड़ती है। विष्णु चार माह पश्चात प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी को जागते हैं।