चौघड़िया क्या है?
चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात्रि (सूर्यास्त से सूर्योदय) को प्रत्येक आठ बराबर भागों में बाँटता है। हर भाग एक चौघड़िया है, जिसका स्वामी एक ग्रह होता है और उसका एक निश्चित गुण होता है — शुभ, सामान्य या अशुभ। पूर्ण मुहूर्त निकाले बिना दैनिक कार्य — यात्रा, खरीद, बैठक — के लिए शुभ समय ढूँढने का यह सबसे तेज़ तरीका है।
सात चौघड़िया
- अमृत (चंद्र) — सर्वश्रेष्ठ; सभी कार्यों हेतु शुभ।
- शुभ (गुरु) — शुभ; संस्कार, महत्वपूर्ण कार्य।
- लाभ (बुध) — लाभ; व्यापार, अध्ययन।
- चर (शुक्र) — चंचल/सामान्य; यात्रा, नित्य कार्य।
- रोग (मंगल) — त्याज्य; रोग, कलह।
- काल (शनि) — त्याज्य; हानि।
- उद्वेग (सूर्य) — त्याज्य; चिंता, केवल राजकीय कार्य।
अमृत, शुभ और लाभ शुभ हैं; चर सामान्य (प्रयोग योग्य) है; रोग, काल और उद्वेग नए कार्यों हेतु टाले जाते हैं।
दिन एवं रात्रि चौघड़िया
आठ दिन के भाग सूर्योदय से और आठ रात्रि के भाग सूर्यास्त से चलते हैं — इसलिए हर चौघड़िया की घड़ी-अवधि आपके स्थान और तिथि पर दिन/रात की लंबाई पर निर्भर करती है। दिन का प्रारंभिक चौघड़िया वार से तय होता है।
चौघड़िया का उपयोग
अमृत, शुभ या लाभ का ऐसा समय चुनें जो राहु काल, यमगंड और गुलिक से मुक्त हो (ऊपर दिखाया गया)। घंटेवार सूक्ष्म समय हेतु होरा देखें, और तिथि-नक्षत्र हेतु आज का पंचांग पढ़ें।