महत्व
गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र की मूसलधार वर्षा से वृंदावनवासियों की रक्षा हेतु गोवर्धन पर्वत को कनिष्ठा उंगली पर उठाने का स्मरण है — प्रकृति-भक्ति का संदेश।
यह दीवाली के अगले दिन, पर्व का चौथा दिन है।
विधि
भक्त गोबर या अन्न से गोवर्धन की प्रतिकृति बनाकर पूजा करते तथा कृष्ण को अन्नकूट — अनेक व्यंजनों का "पर्वत" — अर्पित करते हैं। गौओं को सजाकर सम्मान दिया जाता है।
तिथि कैसे तय होती है
गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को, दीवाली (अमावस्या) के अगले दिन पड़ती है।