महत्व
गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र एवं कोंकण का नववर्ष है, जो चैत्र मास के प्रथम दिन पड़ता है। गुड़ी — बांस पर बंधा चमकीला वस्त्र, माला एवं उल्टा कलश — घर के बाहर विजय एवं सौभाग्य के प्रतीक रूप में खड़ी की जाती है।
यह वर्ष के साढ़े तीन शुभ मुहूर्तों में एक माना जाता है, नए कार्यों हेतु उत्तम।
विधि
सूर्योदय पर गुड़ी खिड़की या द्वार पर स्थापित कर पूजी जाती है। घर रंगोली एवं आम-पत्तों से सजते हैं। नीम एवं गुड़ का पहला ग्रास जीवन के कड़वे-मीठे को साथ स्वीकारने का प्रतीक है।
तिथि कैसे तय होती है
गुड़ी पड़वा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को — चांद्र वर्ष के प्रथम दिन, दक्षिण में उगादी वाले दिन — पड़ती है।