महत्व
गुरु पूर्णिमा अपने आध्यात्मिक एवं शैक्षिक गुरुओं के प्रति कृतज्ञता का पर्व है। यह वेदों के संकलनकर्ता एवं महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास का भी सम्मान है, अतः इसे व्यास पूर्णिमा कहते हैं।
अज्ञान का अंधकार दूर करने वाला गुरु ईश्वर तक सेतु माना जाता है।
विधि
शिष्य अपने गुरुओं की पूजा कर उपहार एवं कृतज्ञता अर्पित करते हैं। साधक इस दिन नई साधना आरंभ करते हैं। बौद्धों हेतु यह बुद्ध के प्रथम उपदेश का दिन है।
तिथि कैसे तय होती है
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को पड़ती है।