महत्व
हरतालिका तीज सुखी दांपत्य एवं सुयोग्य पति हेतु स्त्रियों द्वारा रखा जाने वाला कठोर निर्जल व्रत है। यह शिव को पति रूप में पाने हेतु पार्वती की घोर तपस्या का स्मरण है।
नाम हरत (हरण) एवं आलिका (सखी) से बना है — पार्वती की सखी उन्हें तप हेतु ले गई थी।
विधि
स्त्रियाँ अन्न-जल रहित दिन-रात व्रत रखतीं, शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर रात्रि भर पुष्प, फल एवं तीज कथा से पूजा करती हैं। अगले प्रातः पारण होता है।
तिथि कैसे तय होती है
हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को, गणेश चतुर्थी से एक दिन पूर्व पड़ती है।