महत्व
रंगों का पर्व होली वसंत के आगमन, बुराई पर भलाई की विजय तथा राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का उत्सव है। यह आनंद, क्षमा एवं नवीनता का दिन है जब सामाजिक भेद रंगों में घुल जाते हैं।
यह होलिका दहन के अगले दिन रंगवाली होली या धुलंडी के रूप में मनाई जाती है।
विधि
लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाते, रंग-जल डालते, ढोल पर नाचते-गाते तथा गुजिया एवं ठंडाई का आनंद लेते हैं। "बुरा न मानो, होली है" कहकर पुराने गिले-शिकवे भुला दिए जाते हैं।
तिथि कैसे तय होती है
होली चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को — फाल्गुन पूर्णिमा (होलिका दहन) के अगले दिन — खेली जाती है। ऊपर दी तिथि आपके नगर हेतु है।