महत्व
करवा चौथ एक प्रिय पर्व है जिसमें सुहागिनें पति की दीर्घायु एवं कल्याण हेतु सूर्योदय से चंद्रोदय तक कठोर निर्जल व्रत रखती हैं। कुँवारी कन्याएं भी मनोवांछित वर हेतु यह व्रत रखती हैं।
यह दांपत्य प्रेम एवं समर्पण का पर्व है; छलनी से चंद्र-दर्शन इसकी प्रतीक विधि बन गई है।
विधि
स्त्रियाँ भोर पूर्व सरगी खातीं, दिन भर निर्जल व्रत रखतीं, सोलह-शृंगार करती हैं तथा संध्या को करवा चौथ कथा हेतु एकत्र होकर सजा करवा फेरती हैं। चंद्रोदय पर छलनी से चंद्र एवं पति के दर्शन कर पति के हाथों जल एवं भोजन ग्रहण कर पारण करती हैं।
तिथि कैसे तय होती है
करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को पड़ती है; व्रत चंद्रोदय पर खोला जाता है, अतः ऊपर आपके नगर हेतु चंद्रोदय समय दिया है।