महत्व
लोहड़ी शीत ऋतु के अंत एवं रबी फसल का पंजाबी पर्व है। यह मकर संक्रांति की पूर्व संध्या, लगभग 13 जनवरी को पड़ता है।
इसकी केंद्रीय अग्नि अग्निदेव एवं सूर्य की लौटती ऊष्मा का सम्मान है।
विधि
संध्या को परिवार एवं पड़ोसी अग्नि के चारों ओर एकत्र होकर तिल, गुड़, मूंगफली एवं रेवड़ी अर्पित करते हैं, लोकगीत गाते एवं भांगड़ा-गिद्दा करते हैं। नवजात शिशु एवं नवविवाहितों के लिए यह विशेष है।
तिथि कैसे तय होती है
लोहड़ी पौष मास के अंतिम दिन, मकर संक्रांति से एक रात पूर्व मनाई जाती है, अतः प्रायः 13 जनवरी को पड़ती है।