महत्व
नरक चतुर्दशी (छोटी दीवाली या रूप चौदस) भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर वध एवं 16,000 बंदियों की मुक्ति का स्मरण है। यह दीपावली का दूसरा दिन है।
प्रातःकालीन स्नान पापों का नाश एवं रूप-सौंदर्य देने वाला माना जाता है, अतः रूप चौदस।
विधि
भक्त भोर पूर्व अभ्यंग स्नान (तेल स्नान) करते, दीप जलाते एवं यम को अर्घ्य देते हैं। मुख्य लक्ष्मी पूजा की पूर्व संध्या पर घर दीपों से जगमगाते हैं।
तिथि कैसे तय होती है
नरक चतुर्दशी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को, दीवाली से एक दिन पूर्व पड़ती है; अभ्यंग स्नान भोर में किया जाता है।