महत्व
पोंगल तमिल फसल पर्व है — अच्छी फसल हेतु सूर्य देव को चार दिन का धन्यवाद। यह मकर संक्रांति के साथ पड़ता है और उत्तरायण का आरंभ है।
इसका नाम उस विशेष व्यंजन से है जिसमें नई फसल का चावल दूध एवं गुड़ के साथ तब तक पकाया जाता है कि वह बर्तन से उमड़ पड़े — समृद्धि का प्रतीक।
विधि
चार दिन — भोगी, थाई पोंगल, मट्टु पोंगल एवं कानुम पोंगल — क्रमशः पुराने का त्याग, सूर्य को पोंगल अर्पण, गौ-पूजन एवं पारिवारिक मिलन के होते हैं। घर कोलम से सजाए जाते हैं।
तिथि कैसे तय होती है
थाई पोंगल तमिल मास 'थाई' के प्रथम दिन पड़ता है, जब सूर्य मकर में प्रवेश करता है — मकर संक्रांति वाली ही सौर घटना, लगभग 14–15 जनवरी।