प्रदोष व्रत 2024

स्थान:
वर्ष
20242025
पर्वतिथि
भौम प्रदोष (कृष्ण)मंगलवार, 9 जनवरी 2024
भौम प्रदोष (शुक्ल)मंगलवार, 23 जनवरी 2024
सौम्य प्रदोष (कृष्ण)बुधवार, 7 फ़रवरी 2024
सौम्य प्रदोष (शुक्ल)बुधवार, 21 फ़रवरी 2024
भृगु प्रदोष (कृष्ण)शुक्रवार, 8 मार्च 2024
भृगु प्रदोष (शुक्ल)शुक्रवार, 22 मार्च 2024
शनि प्रदोष (कृष्ण)शनिवार, 6 अप्रैल 2024
भानु प्रदोष (शुक्ल)रविवार, 21 अप्रैल 2024
भानु प्रदोष (कृष्ण)रविवार, 5 मई 2024
भौम प्रदोष (शुक्ल)मंगलवार, 21 मई 2024
भौम प्रदोष (कृष्ण)मंगलवार, 4 जून 2024
सौम्य प्रदोष (शुक्ल)बुधवार, 19 जून 2024
सौम्य प्रदोष (कृष्ण)बुधवार, 3 जुलाई 2024
भृगु प्रदोष (शुक्ल)शुक्रवार, 19 जुलाई 2024
गुरु प्रदोष (कृष्ण)गुरुवार, 1 अगस्त 2024
शनि प्रदोष (शुक्ल)शनिवार, 17 अगस्त 2024
शनि प्रदोष (कृष्ण)शनिवार, 31 अगस्त 2024
भानु प्रदोष (शुक्ल)रविवार, 15 सितंबर 2024
भानु प्रदोष (कृष्ण)रविवार, 29 सितंबर 2024
भौम प्रदोष (शुक्ल)मंगलवार, 15 अक्टूबर 2024
भौम प्रदोष (कृष्ण)मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024
सौम्य प्रदोष (शुक्ल)बुधवार, 13 नवंबर 2024
गुरु प्रदोष (कृष्ण)गुरुवार, 28 नवंबर 2024
भृगु प्रदोष (शुक्ल)शुक्रवार, 13 दिसंबर 2024
शनि प्रदोष (कृष्ण)शनिवार, 28 दिसंबर 2024

महत्व

प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाने वाला प्रदोष व्रत शिव-पार्वती को समर्पित है। सूर्यास्त के आसपास प्रदोष काल में पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

व्रत अपने वार का गुण धारण करता है: सोम प्रदोष (सोमवार) मनोकामना हेतु, भौम प्रदोष (मंगल) आरोग्य हेतु, शनि प्रदोष (शनिवार) संतान हेतु।

विधि

भक्त दिन भर व्रत रखकर प्रदोष काल में शिवलिंग की जल, बेलपत्र एवं दीप से पूजा कर प्रदोष व्रत कथा सुनते हैं। संध्या पूजा के पश्चात पारण होता है।

वर्ष भर के प्रदोष

ऊपर चयनित वर्ष के प्रत्येक प्रदोष उसके वार-आधारित नाम सहित दिए हैं। तिथियाँ देखने हेतु वर्ष चुनें।

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