महत्व
संक्रांति सूर्य के एक राशि से अगली राशि में संक्रमण को दर्शाती है। वर्ष में बारह संक्रांतियाँ होती हैं, प्रत्येक उस राशि के नाम पर जिसमें सूर्य प्रवेश करता है — मकर, कुंभ, मीन आदि। मकर एवं मेष संक्रांति सर्वाधिक मनाई जाती हैं।
संक्रमण का क्षण एवं आसपास का पुण्य काल स्नान, दान एवं पूजा हेतु शुभ है।
विधि
भक्त पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देते तथा पुण्य काल में अन्न, तिल एवं वस्त्र का दान करते हैं। प्रत्येक संक्रांति की अपनी क्षेत्रीय परंपराएं हैं।
वर्ष भर की संक्रांति
ऊपर चयनित वर्ष की सभी बारह संक्रांतियाँ, सूर्य जिस राशि में प्रवेश करता है उसके साथ दी हैं। तिथियाँ देखने हेतु वर्ष चुनें।