महत्व
सरस्वती पूजा विद्या, बुद्धि, संगीत एवं कला की देवी की आराधना है। बंगाल, बिहार एवं पूर्व में विशेष उत्साह से मनाई जाती है और बसंत पंचमी के साथ पड़ती है।
विद्यार्थी, शिक्षक, संगीतकार एवं कलाकार विशेष रूप से देवी का आशीर्वाद लेते हैं।
विधि
श्वेत या पीत वस्त्र में सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर पुष्प एवं फल से पूजा होती है। पुस्तकें एवं वाद्य देवी के चरणों में रखे जाते हैं; बच्चों का हाथेखड़ी संस्कार होता है। सामूहिक अंजलि दी जाती है।
तिथि कैसे तय होती है
यह माघ शुक्ल पंचमी को — बसंत पंचमी वाले दिन ही — पड़ती है। ऊपर दिया मुहूर्त आपके नगर हेतु पंचमी तिथि का शुभ समय है।