गौरी पंचांगम क्या है?
गौरी पंचांगम (तमिल नल्ला नेरम, "शुभ समय") दिन भर के शुभ समय जानने की एक दक्षिण भारतीय पद्धति है। चौघड़िया की भाँति इसे केवल सूर्योदय, सूर्यास्त एवं वार चाहिए — कोई जन्म कुंडली नहीं। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को 8 बराबर कालों में और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात्रि को अन्य 8 में बाँटा जाता है।
आठ काल
प्रत्येक काल का आठ नामों में से एक नाम और निश्चित स्वभाव होता है। पाँच शुभ हैं — अमृत (अमिर्धम), सुगम, उथी (उद्योगम), लाभम तथा धनम — और तीन त्याज्य हैं: रोगम, सोरम (सूलम) तथा विषम। वार तय करता है कि दिन किस काल से आरंभ हो, फिर क्रम आठों कालों में दोहराता है; रात्रि उसी चक्र में चार पद आगे से चलती है।
समय कैसे तय होता है
चूँकि दिन और रात्रि प्रत्येक आठ बराबर भागों में बँटते हैं, काल की अवधि आपके स्थान एवं तिथि पर दिन/रात की लंबाई पर निर्भर करती है — ग्रीष्म में लंबी, शीत में छोटी। समय आपके नगर के अनुसार हो, इसके लिए ऊपर अपना स्थान चुनें।
गौरी पंचांगम का उपयोग
महत्वपूर्ण कार्य हेतु शुभ (हरा) काल चुनें और इसे दिन के पंचांग, चौघड़िया तथा अशुभ राहु काल, यमगंड एवं गुलिक के साथ पढ़ें।