पंचक क्या है?
पंचक प्रत्येक माह की लगभग पाँच दिन की वह अवधि है जब चंद्रमा अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा (उत्तरार्ध), शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद और रेवती — अर्थात कुम्भ और मीन राशि में गोचर करता है। ये पाँच साथ आने के कारण इस अवधि को "पंचक" कहा जाता है और इसमें कुछ कार्य परंपरा से टाले जाते हैं।
पंचक के पाँच प्रकार
पंचक अपना नाम और स्वभाव उस वार से पाता है जिस दिन वह आरंभ होता है:
- रोग पंचक (रविवार से आरंभ) — रोग से संबंधित; स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कार्य न आरंभ करें।
- राज पंचक (सोमवार से आरंभ) — अपेक्षाकृत शुभ माना जाता है, संपत्ति और प्रशासनिक कार्यों हेतु अच्छा।
- अग्नि पंचक (मंगलवार से आरंभ) — अग्नि, विवाद और दुर्घटना से जुड़ा; जोखिम या मुकदमे संबंधी आरंभ टालें।
- चोर पंचक (शुक्रवार से आरंभ) — चोरी और हानि से संबंधित; बड़े लेन-देन और मूल्यवान वस्तुओं सहित यात्रा टालें।
- मृत्यु पंचक (शनिवार से आरंभ) — सर्वाधिक सावधानी; जोखिमपूर्ण उद्यम और यात्रा टालें।
बुधवार या गुरुवार से आरंभ पंचक में कोई विशेष दोष नहीं होता और उसे सामान्य पंचक माना जाता है।
पंचक में परंपरा से क्या टाला जाता है
शास्त्रों में पंचक में पाँच कार्य टालने कहे गए हैं — दक्षिण दिशा की यात्रा, लकड़ी या ईंधन एकत्र करना, घर की छत डालना, खाट/पलंग बनाना, और अंत्येष्टि (जो अनिवार्य होने पर विशेष शांति के साथ की जाती है)। नित्य कार्य, पूजा और शुभ संस्कार सामान्यतः वर्जित नहीं होते।
समय की गणना कैसे होती है
पंचक उसी क्षण आरंभ होता है जब चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध (300°) में प्रवेश करता है और तब समाप्त होता है जब वह रेवती (360°) से निकलता है। ये सटीक खगोलीय क्षण हैं, पृथ्वी पर सर्वत्र एक समान — केवल घड़ी-समय समय-क्षेत्र से भिन्न होता है, इसीलिए ऊपर अपना स्थान चुन सकते हैं। गणना लाहिड़ी अयनांश से की जाती है।
यह भी देखें — आज का पंचांग और मासिक पंचांग (पंचक, गंडमूल एवं भद्रा सहित)।