राहु काल क्या है?
राहु काल (राहु कालम) प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की वह अवधि है जिसमें कोई भी शुभ कार्य आरंभ करना परंपरा से टाला जाता है — यात्रा, नया उद्यम, खरीद, संस्कार या अनुबंध पर हस्ताक्षर। यह छाया ग्रह राहु द्वारा शासित है और दिन के अशुभ कालों में सबसे अधिक देखा जाने वाला है।
राहु काल की गणना कैसे होती है
दिन का समय — सूर्योदय से सूर्यास्त तक — आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। इनमें से एक भाग राहु काल होता है, और वह कौन-सा भाग होगा यह केवल वार पर निर्भर करता है। चूँकि इसे स्थानीय सूर्योदय से मापा जाता है, राहु काल हर शहर में भिन्न घड़ी-समय पर आरंभ होता है और सूर्योदय बदलने के साथ दिन-प्रतिदिन थोड़ा खिसकता है। इसीलिए ऊपर की तालिका पूरे देश का एक समय देने के बजाय प्रत्येक शहर को अलग दर्शाती है।
वार के अनुसार राहु काल
सूर्योदय से आठ भाग गिनने पर राहु काल पड़ता है — रविवार को 8वें भाग, सोमवार को 2रे, मंगलवार को 7वें, बुधवार को 5वें, गुरुवार को 6ठे, शुक्रवार को 4थे और शनिवार को 3रे भाग में। लगभग 6 बजे सूर्योदय और 6 बजे सूर्यास्त पर यह रविवार को लगभग सायं 4:30–6:00, सोमवार को प्रातः 7:30–9:00 इत्यादि होता है — परंतु अपने शहर और तिथि का सटीक समय ऊपर अवश्य देखें।
यमगंड एवं गुलिक काल
इन्हीं आठ भागों से दो और अशुभ अवधियाँ निकाली जाती हैं। यमगंड प्रायः आरंभ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए टाला जाता है, और गुलिक काल (शनि पुत्र गुलिक/मांदी द्वारा शासित) के प्रभाव सबसे स्थायी माने जाते हैं — इसमें आरंभ किया कार्य पुनरावृत्त होता कहा जाता है। दोनों आपके स्थान के लिए ऊपर दिखाए गए हैं।
राहु काल का उपयोग
- इसके आसपास योजना बनाएँ — राहु काल में मुहूर्त, यात्रा या हस्ताक्षर न रखें; इससे पहले या बाद का निर्मल समय चुनें।
- यह नित्य कार्य नहीं रोकता — चालू कार्य, दैनिक कर्तव्य और पहले से जारी यात्रा इससे प्रभावित नहीं; यह नए आरंभ पर लागू होता है।
- दिन की जाँच करें — इसे दिन की तिथि, नक्षत्र और योग के साथ आज के पंचांग में पढ़ें, और शुभ समय चौघड़िया एवं होरा में देखें।
विषय में नए हैं? पहले पढ़ें — पंचांग क्या है और इसके पाँच अंग कैसे काम करते हैं।