दैनिक पंचांग

Tuesday, 4 August 2026 · Columbus
तिथि षष्ठी कृष्ण पक्ष, विक्रम संवत 2083

सूर्योदय एवं चंद्रोदय

सूर्योदय6:33:09 AM
सूर्यास्त8:43:33 PM
चंद्रोदय11:29:12 PM

पंचांग

तिथिषष्ठी 03-Aug-26 01:24 PM04-Aug-26 12:33 PMसप्तमी 04-Aug-26 12:33 PM05-Aug-26 11:12 AM
नक्षत्ररेवती 03-Aug-26 12:30 PM04-Aug-26 12:24 PMअश्विनी 04-Aug-26 12:24 PM05-Aug-26 11:48 AM
योगधृति 03-Aug-26 11:43 AM04-Aug-26 10:03 AMShula 04-Aug-26 10:03 AM05-Aug-26 07:59 AM
करणवणिज 04-Aug-26 01:03 AM04-Aug-26 12:33 PMविष्टि 04-Aug-26 12:33 PM04-Aug-26 11:57 PMबव 04-Aug-26 11:57 PM05-Aug-26 11:12 AM
वारमंगलवार
पक्षकृष्ण

राशि एवं नक्षत्र

चंद्र राशिमीन 02-Aug-26 05:57 AM04-Aug-26 12:24 PMमेष 04-Aug-26 12:24 PM06-Aug-26 04:23 PM
सूर्य राशिकर्क
नक्षत्र पादरेवती - 4 04-Aug-26 06:28 AM04-Aug-26 12:24 PMअश्विनी - 1 04-Aug-26 12:24 PM04-Aug-26 06:18 PMअश्विनी - 2 04-Aug-26 06:18 PM05-Aug-26 12:10 AMअश्विनी - 3 05-Aug-26 12:10 AM05-Aug-26 06:00 AMअश्विनी - 4 05-Aug-26 06:00 AM05-Aug-26 11:48 AM
नक्षत्र स्वामीबुध
गणदेव
योनिगज
नाड़ीअन्त्य
वर्णब्राह्मण
वश्यजलचर
तत्वपृथ्वी

चंद्र मास एवं संवत

विक्रम संवत2083 सिद्धार्थी
शक संवत1948 पराभव
गुजराती संवत2082 पिंगल
चंद्रमास (अमांत)आषाढ़
चंद्रमास (पूर्णिमांत)श्रावण
मासश्रावण

ऋतु एवं अयन

ऋतु (वैदिक)ग्रीष्म
ऋतु (दृक)वर्षा
अयनदक्षिणायन
गोलउत्तर
दिनमान-9 Hours -49 Mins -36 Secs
रात्रिमान33 Hours 50 Mins 33 Secs
मध्याह्न1:38:21 AM

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त2:03:21 AM, 5 अगस्त to 4:18:43 AM, 5 अगस्त
प्रातः संध्या3:11:02 AM, 5 अगस्त to 6:34:05 AM, 5 अगस्त
अभिजितनहीं
विजय मुहूर्त12:00:05 AM to 11:20:46 PM, 3 अगस्त
गोधूलि मुहूर्त8:42:33 PM, 3 अगस्त to 9:02:33 PM, 3 अगस्त
सायाह्न संध्या8:43:33 PM, 3 अगस्त to 12:06:36 AM
अमृत कालनहीं
निशीथ मुहूर्त12:31:08 PM to 2:46:30 PM

अशुभ समय

राहु काल11:10:57 PM, 3 अगस्त to 9:57:15 PM, 3 अगस्त
यमगण्ड4:05:45 AM to 2:52:03 AM
गुलिक काल1:38:21 AM to 12:24:39 AM
दुर मुहूर्त4:35:14 AM to 3:55:55 AM · 1:58:00 AM to 1:18:42 AM
वर्ज्यनहीं

निवास एवं शूल

दिशा शूलउत्तर
होमाहुतिमंगल
अग्निवासआकाश
शिववासभोजन में
चंद्र वासउत्तर
राहु वासदक्षिण
आनंदादि योगसिद्धि

सूर्योदय कालीन लग्न कुंडली

सूर्योदय कालीन लग्न कुंडली
ग्रहराशिअंशनक्षत्रपाद
लग्नकर्क16°52'28"आश्लेषा1
सूर्यकर्क17°50'56"आश्लेषा1
चंद्रमीन26°42'30"रेवती4
मंगलमिथुन01°09'16"मृगशिरा3
बुधमिथुन28°37'24"पुनर्वसु3
गुरुकर्क13°29'30"पुष्य4
शुक्रकन्या03°22'15"उत्तर फाल्गुनी3
शनिRमीन20°27'20"रेवती2
राहुकुंभ05°39'35"धनिष्ठा4
केतुसिंह05°39'35"माघ2

चंद्रबल एवं ताराबल

शुभ चंद्रबल12:24:20 PM तक — वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन
शुभ चंद्रबल6:34:05 AM, 5 अगस्त तक — मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुंभ
शुभ ताराबल12:24:20 PM तक — अश्विनी, भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, माघ, पूर्व फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, श्रावण, शतभिषा, उत्तर भाद्रपद
शुभ ताराबल6:34:05 AM, 5 अगस्त तक — भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्व फाल्गुनी, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठ, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्व भाद्रपद, रेवती

अन्य कैलेंडर एवं युग

कलियुग5127 वर्ष
अयनांशलाहिड़ी 24°13'43"
कलि अहर्गण1872791 दिन
जूलियन दिवस2461256.5
राता डाई739832
संशोधित जूलियन दिवस61256
राष्ट्रीय शक तिथिश्रावण 13, 1948 शक

आज का पंचांग कैसे पढ़ें

ऊपर दी गई तालिकाएँ आपके चुने हुए नगर और तिथि का दैनिक पंचांग हैं। प्रत्येक मान उस स्थान के सूर्योदय के लिए गणना किया गया है, क्योंकि हिंदू दिन का आरंभ सूर्योदय से होता है, मध्यरात्रि से नहीं — पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

पंचांग के हर अंग के साथ उसके आरंभ और समाप्ति का समय दिया गया है, जैसे नवमी 5:17:10 AM – 7:03:49 AM, 23 जुलाई। जहाँ पंक्ति में तारीख दिखे, वह क्षण किसी अन्य दिन का है — अंग प्रायः पिछली शाम आरंभ होते हैं या मध्यरात्रि के बाद समाप्त। चूँकि तिथि या नक्षत्र ठीक 24 घंटे का नहीं होता, अधिकांश दिनों में दो-दो आते हैं — सूर्योदयकालीन और उसके बाद वाला — दोनों दिखाए गए हैं ताकि परिवर्तन का क्षण स्पष्ट रहे।

आज की तिथि

तिथि चंद्र दिवस है — सूर्य और चंद्रमा के बीच 12° के अंतर की इकाई। आज के पंचांग में सबसे अधिक देखी जाने वाली पंक्ति यही है, क्योंकि व्रत और त्योहार अंग्रेज़ी तारीख से नहीं, तिथि से तय होते हैं। एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, संकष्टी चतुर्थी और प्रदोष — सभी तिथि पर आधारित हैं। पक्ष बताता है कि चंद्रमा शुक्ल में है या कृष्ण में।

दिन का नाम सूर्योदय के समय चल रही तिथि से पड़ता है, चाहे वह कुछ ही देर बाद समाप्त हो जाए — इसीलिए व्रत निश्चित करते समय आरंभ-समाप्ति का समय महत्वपूर्ण है।

आज का नक्षत्र

नक्षत्र वह चंद्र भवन है जिससे चंद्रमा गुजर रहा है — 27 भागों में से एक, प्रत्येक 13°20' का। आज का नक्षत्र दिन का स्वभाव तय करता है और मुहूर्त चुनते समय दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यही है — यात्रा, कार्यारंभ, नामकरण या कोई स्थायी वस्तु खरीदने के लिए।

हर नक्षत्र 3°20' के चार पादों में बँटा है, जो "राशि एवं नक्षत्र" तालिका में अलग-अलग दिए गए हैं। नामकरण और सूक्ष्म मुहूर्त के लिए पाद देखा जाता है; यह लगभग हर छह घंटे में बदलता है।

आज का योग एवं करण

योग सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त अंश से बनता है और 27 भागों में बँटा है; सिद्ध और अमृत जैसे योग शुभ माने जाते हैं, जबकि व्यतीपात और वैधृति में नए कार्य टाले जाते हैं। करण आधी तिथि है, अतः हर चंद्र दिवस में दो करण पड़ते हैं — दोनों अपने समय सहित तालिका में हैं।

आज का वार

वार अर्थात सप्ताह का दिन और उसका स्वामी ग्रह — रविवार सूर्य, सोमवार चंद्रमा, मंगलवार मंगल, बुधवार बुध, गुरुवार बृहस्पति, शुक्रवार शुक्र और शनिवार शनि। यह ग्रह पूरे दिन को प्रभावित करता है, इसीलिए कुछ कार्य परंपरा से विशेष वार के लिए रखे जाते हैं।

आज के पंचांग में शुभ मुहूर्त

दिन और रात, दोनों पंद्रह-पंद्रह मुहूर्तों में बँटे हैं। तालिका के शुभ समय इसी विभाजन से निकलते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त — भोर से पहले का मुहूर्त; अध्ययन, ध्यान और जप का शास्त्रीय समय।
  • प्रातः संध्या — सूर्योदय पर समाप्त होती संध्या; सायाह्न संध्या सूर्यास्त के बाद की। दोनों संध्यावंदन के लिए हैं।
  • अभिजित — दिन का आठवाँ मुहूर्त, मध्याह्न के आसपास। यह अधिकांश दोषों का शमन करता है। बुधवार को इसे नहीं लिया जाता, इसलिए तालिका में "नहीं" दिख सकता है।
  • विजय मुहूर्त — ग्यारहवाँ मुहूर्त; विरोध के बीच सफल होने वाले कार्यों के लिए।
  • गोधूलि मुहूर्त — सूर्यास्त के आसपास का समय, विवाह के लिए प्रचलित।
  • अमृत काल — नक्षत्र से निकाला गया अमृततुल्य समय; आरंभ के लिए उत्तम।
  • निशीथ मुहूर्त — मध्यरात्रि का मुहूर्त; रात्रि पूजा एवं जन्माष्टमी जैसे व्रतों के लिए।

आज के पंचांग में अशुभ समय

इनमें तीन दिनमान के आठवें भाग हैं और वार के अनुसार बदलते हैं:

  • राहु काल — सर्वाधिक प्रसिद्ध; इस अवधि में नया कार्य, यात्रा और क्रय टाले जाते हैं।
  • यमगण्ड एवं गुलिक काल — वार पर आधारित अन्य दो अवधियाँ, इन्हीं कारणों से वर्जित।
  • दुर मुहूर्त — उस वार के लिए अशुभ माने गए दिन-मुहूर्त।
  • वर्ज्य — नक्षत्र से गणना किया गया त्याज्य समय; ऊपर दिया अमृत काल इसी का बीस घटी बाद वाला रूप है।

चल रहे कार्य इन अवधियों में रोके नहीं जाते — ये केवल आरंभ के लिए वर्जित हैं।

दिनमान, रात्रिमान एवं मध्याह्न

दिनमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक की अवधि है और रात्रिमान उसके बाद की रात्रि। मध्याह्न दिन का मध्य बिंदु है। ऊपर दिए सभी मुहूर्त इन्हीं दो अवधियों के अंश हैं — इसीलिए हर समय वर्ष भर और नगर के अनुसार बदलता रहता है।

निवास एवं शूल

ये पारंपरिक संकेत यात्रा और संस्कारों से पूर्व देखे जाते हैं। दिशा शूल उस वार में जिस दिशा में यात्रा वर्जित है वह बताता है; अग्निवास, शिववास, चंद्र वास और राहु वास उन शक्तियों का निवास दर्शाते हैं; होमाहुति उस दिन आहुति ग्रहण करने वाले ग्रह का नाम है। आनंदादि योग वार और नक्षत्र के संयोग से अट्ठाईस में से एक फल देता है।

दैनिक पंचांग नगर के अनुसार क्यों बदलता है

पंचांग खगोलीय गणना है, प्रशासनिक नहीं। सूर्योदय-सूर्यास्त आपके अक्षांश और देशांतर पर निर्भर हैं, और पंचांग का हर अंग सूर्योदय से पढ़ा जाता है — इसलिए एक ही तारीख को दिल्ली और चेन्नई में सूर्योदयकालीन तिथि भिन्न हो सकती है, और इसी कारण कभी-कभी त्योहार की तिथि क्षेत्र के अनुसार बदल जाती है। निर्णय लेने से पहले ऊपर अपना नगर अवश्य चुनें।

आज के पंचांग का उपयोग

  • व्रत एवं त्योहार — व्रत किस दिन पड़ेगा यह तय करने से पहले सूर्योदयकालीन तिथि और उसका समाप्ति समय देखें।
  • मुहूर्त — तिथि, नक्षत्र और योग एक साथ पढ़ें, तालिका से शुभ अवधि चुनें, और देख लें कि वह राहु काल या वर्ज्य से न टकराए। घंटेवार समय के लिए चौघड़िया एवं होरा देखें।
  • नित्य साधना — ऊपर दिया सूर्योदय समय और ब्रह्म मुहूर्त प्रातः कर्म का आधार हैं।

विषय में नए हैं? पहले पढ़ें — पंचांग क्या है और इसके पाँच अंग कैसे काम करते हैं

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह ऊपर पंचांग तालिका में दी गई है, आपके चुने हुए नगर के सूर्योदय के अनुसार। सही उत्तर के लिए ड्रॉपडाउन से अपना नगर चुनें।

नहीं। पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर पढ़े जाते हैं, इसलिए देशांतर में दूर स्थित नगरों में एक ही तारीख को तिथि या नक्षत्र भिन्न हो सकते हैं।

सूर्योदय पर, मध्यरात्रि पर नहीं। आज का पंचांग आपके स्थान पर कल के सूर्योदय तक लागू रहता है।

लाहिड़ी (चित्रपक्ष), जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और अधिकांश प्रकाशित पंचांगों का मानक है।

हाँ — ऊपर दिए गए दिनांक चयनकर्ता का उपयोग करें। तीरों से एक-एक दिन आगे-पीछे जाएँ या किसी भी तिथि पर सीधे पहुँचें।

क्योंकि नक्षत्र ठीक एक दिन का नहीं होता। तालिका में सूर्योदय के समय चल रहा नक्षत्र और उसके बाद वाला, दोनों अपने आरंभ-समाप्ति समय सहित दिए जाते हैं, जिससे परिवर्तन का क्षण स्पष्ट रहे।

राहु काल दिनमान का आठवाँ भाग है, जिसकी स्थिति वार से तय होती है। इस अवधि में नया कार्य, यात्रा और बड़ी खरीद टाली जाती है — चल रहा कार्य रोका नहीं जाता। यमगण्ड और गुलिक काल भी इसी प्रकार देखे जाते हैं।

अभिजित दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ है, जो मध्याह्न के आसपास पड़ता है और तब लिया जाता है जब कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो। बुधवार को यही अवधि दुर मुहूर्त मानी जाती है, इसलिए उस दिन अभिजित नहीं दिखाया जाता।

दोनों चल रहे नक्षत्र से गणना किए जाते हैं। वर्ज्य वह समय है जिसमें नया कार्य त्याज्य है; अमृत काल उसी अवधि का बीस घटी (लगभग आठ घंटे) बाद वाला रूप है और आरंभ के लिए विशेष शुभ माना जाता है।

दिनमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक की अवधि है और रात्रिमान उसके बाद की रात्रि। इस पृष्ठ का हर मुहूर्त इन्हीं का अंश है — इसीलिए सभी समय वर्ष भर और नगर के अनुसार बदलते हैं।

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