अष्टम भाव (आयु भाव)
अष्टम भाव (आयु भाव) वैदिक कुंडली का 8वाँ भाव है। इसकी नैसर्गिक राशि वृश्चिक है, स्वामी मंगल, एवं कारक शनि। यह आयु, आकस्मिक घटनाएँ, उत्तराधिकार का स्वामी है। यहाँ अष्टम भाव का अर्थ, बलवान या पीड़ित अष्टम भाव के फल, एवं इसे पढ़ने की विधि दी गई है।
मुख्य तथ्य
| नैसर्गिक राशि | वृश्चिक |
| नैसर्गिक स्वामी | मंगल |
| कारक | शनि |
| भाव प्रकार | दुःस्थान |
| अंग (कालपुरुष) | जननांग, उत्सर्जन अंग |
किसका स्वामी है
- आयु एवं मृत्यु
- आकस्मिक घटनाएँ, उथल-पुथल एवं परिवर्तन
- उत्तराधिकार, बीमा एवं दूसरों का धन
- गूढ़ विद्या, अनुसंधान एवं गुप्त विषय
जब यह बलवान हो
बलवान अष्टम भाव दीर्घायु, आकस्मिक लाभ या उत्तराधिकार, गहन अनुसंधान-क्षमता एवं रहस्यमय विषयों में रुचि दे सकता है।
जब यह पीड़ित हो
पीड़ित अष्टम भाव दीर्घकालिक रोग, आकस्मिक हानि, बाधाएँ एवं अप्रत्याशित उथल-पुथल दे सकता है।
इस भाव में ग्रह
इस भाव में कौन-से ग्रह बैठे हैं एवं इसके स्वामी का बल — यही वास्तविक फल तय करते हैं। सामान्यतः नैसर्गिक शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध, वृद्धिमान चंद्र) भाव को बल देते हैं, जबकि पाप ग्रह (शनि, मंगल, राहु, केतु, सूर्य) उसे दबाव देते हैं — केवल उपचय भावों (3, 6, 10, 11) को छोड़कर, जहाँ पाप ग्रह प्रायः उत्तम फल देते हैं।
इसे कैसे पढ़ें
अपनी कुंडली में अष्टम भाव पढ़ने हेतु तीन बातें देखें: भाव पर स्थित राशि, उस राशि का स्वामी ग्रह (एवं वह कहाँ स्थित है), तथा भाव में स्थित कोई भी ग्रह। प्रत्येक भाव हेतु तीनों देखने के लिए निःशुल्क कुंडली बनाएँ।