एकादश भाव (लाभ भाव)

एकादश भाव (लाभ भाव) वैदिक कुंडली का 11वाँ भाव है। इसकी नैसर्गिक राशि कुंभ है, स्वामी शनि, एवं कारक गुरु। यह लाभ, इच्छाओं, बड़े भाई-बहन का स्वामी है। यहाँ एकादश भाव का अर्थ, बलवान या पीड़ित एकादश भाव के फल, एवं इसे पढ़ने की विधि दी गई है।

मुख्य तथ्य

नैसर्गिक राशिकुंभ
नैसर्गिक स्वामीशनि
कारकगुरु
भाव प्रकारउपचय / पणफर
अंग (कालपुरुष)पिंडलियाँ, टखने

किसका स्वामी है

  • लाभ, आय एवं मुनाफ़ा
  • इच्छाओं एवं महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति
  • बड़े भाई-बहन एवं मित्र
  • सामाजिक संपर्क एवं बड़े समूह

जब यह बलवान हो

लाभ का महान भाव एकादश बलवान होने पर प्रचुर आय, इच्छा-पूर्ति, प्रभावशाली मित्र एवं निरंतर बढ़ती समृद्धि देता है।

जब यह पीड़ित हो

पीड़ित एकादश भाव अवरुद्ध आय, अपूर्ण इच्छाएँ, अविश्वसनीय मित्र या संपर्कों से हानि दे सकता है।

इस भाव में ग्रह

इस भाव में कौन-से ग्रह बैठे हैं एवं इसके स्वामी का बल — यही वास्तविक फल तय करते हैं। सामान्यतः नैसर्गिक शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध, वृद्धिमान चंद्र) भाव को बल देते हैं, जबकि पाप ग्रह (शनि, मंगल, राहु, केतु, सूर्य) उसे दबाव देते हैं — केवल उपचय भावों (3, 6, 10, 11) को छोड़कर, जहाँ पाप ग्रह प्रायः उत्तम फल देते हैं।

इसे कैसे पढ़ें

अपनी कुंडली में एकादश भाव पढ़ने हेतु तीन बातें देखें: भाव पर स्थित राशि, उस राशि का स्वामी ग्रह (एवं वह कहाँ स्थित है), तथा भाव में स्थित कोई भी ग्रह। प्रत्येक भाव हेतु तीनों देखने के लिए निःशुल्क कुंडली बनाएँ।