पंचम भाव (पुत्र भाव)

पंचम भाव (पुत्र भाव) वैदिक कुंडली का 5वाँ भाव है। इसकी नैसर्गिक राशि सिंह है, स्वामी सूर्य, एवं कारक गुरु। यह संतान, बुद्धि, प्रेम का स्वामी है। यहाँ पंचम भाव का अर्थ, बलवान या पीड़ित पंचम भाव के फल, एवं इसे पढ़ने की विधि दी गई है।

मुख्य तथ्य

नैसर्गिक राशिसिंह
नैसर्गिक स्वामीसूर्य
कारकगुरु
भाव प्रकारत्रिकोण
अंग (कालपुरुष)उदर, ऊपरी पेट

किसका स्वामी है

  • संतान एवं वंश
  • बुद्धि, ज्ञान एवं शिक्षा
  • प्रेम, रोमांस एवं सृजनशीलता
  • पूर्व पुण्य; मंत्र एवं सट्टा

जब यह बलवान हो

बलवान पंचम भाव तीव्र बुद्धि, उत्तम शिक्षा, संतान-सुख, सृजनशीलता एवं पूर्व-पुण्य की कृपा देता है।

जब यह पीड़ित हो

पीड़ित पंचम भाव संतान या शिक्षा में कठिनाई, दुर्बल निर्णय, या प्रेम में निराशा दे सकता है।

इस भाव में ग्रह

इस भाव में कौन-से ग्रह बैठे हैं एवं इसके स्वामी का बल — यही वास्तविक फल तय करते हैं। सामान्यतः नैसर्गिक शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध, वृद्धिमान चंद्र) भाव को बल देते हैं, जबकि पाप ग्रह (शनि, मंगल, राहु, केतु, सूर्य) उसे दबाव देते हैं — केवल उपचय भावों (3, 6, 10, 11) को छोड़कर, जहाँ पाप ग्रह प्रायः उत्तम फल देते हैं।

इसे कैसे पढ़ें

अपनी कुंडली में पंचम भाव पढ़ने हेतु तीन बातें देखें: भाव पर स्थित राशि, उस राशि का स्वामी ग्रह (एवं वह कहाँ स्थित है), तथा भाव में स्थित कोई भी ग्रह। प्रत्येक भाव हेतु तीनों देखने के लिए निःशुल्क कुंडली बनाएँ।