तृतीय भाव (सहज भाव)

तृतीय भाव (सहज भाव) वैदिक कुंडली का 3वाँ भाव है। इसकी नैसर्गिक राशि मिथुन है, स्वामी बुध, एवं कारक मंगल। यह छोटे भाई-बहन, साहस, संवाद का स्वामी है। यहाँ तृतीय भाव का अर्थ, बलवान या पीड़ित तृतीय भाव के फल, एवं इसे पढ़ने की विधि दी गई है।

मुख्य तथ्य

नैसर्गिक राशिमिथुन
नैसर्गिक स्वामीबुध
कारकमंगल
भाव प्रकारउपचय / आपोक्लिम
अंग (कालपुरुष)भुजाएँ, कंधे, हाथ

किसका स्वामी है

  • छोटे भाई-बहन एवं चचेरे-भाई
  • साहस, पहल एवं इच्छाशक्ति
  • संवाद, लेखन एवं छोटी यात्राएँ
  • कौशल, शौक एवं स्व-प्रयास

जब यह बलवान हो

बलवान तृतीय भाव साहस, उत्साह, संवाद-कौशल, सहयोगी भाई-बहन एवं स्व-प्रयास से सफलता देता है।

जब यह पीड़ित हो

पीड़ित तृतीय भाव कायरता, भाई-बहनों से विवाद, संवाद-समस्याएँ या उत्साह की कमी दे सकता है — यद्यपि उपचय होने से परिश्रम से सुधरता है।

इस भाव में ग्रह

इस भाव में कौन-से ग्रह बैठे हैं एवं इसके स्वामी का बल — यही वास्तविक फल तय करते हैं। सामान्यतः नैसर्गिक शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध, वृद्धिमान चंद्र) भाव को बल देते हैं, जबकि पाप ग्रह (शनि, मंगल, राहु, केतु, सूर्य) उसे दबाव देते हैं — केवल उपचय भावों (3, 6, 10, 11) को छोड़कर, जहाँ पाप ग्रह प्रायः उत्तम फल देते हैं।

इसे कैसे पढ़ें

अपनी कुंडली में तृतीय भाव पढ़ने हेतु तीन बातें देखें: भाव पर स्थित राशि, उस राशि का स्वामी ग्रह (एवं वह कहाँ स्थित है), तथा भाव में स्थित कोई भी ग्रह। प्रत्येक भाव हेतु तीनों देखने के लिए निःशुल्क कुंडली बनाएँ।