मूल नक्षत्र
मूल का अर्थ 'जड़' — किसी वस्तु की तह तक जाने का तारा। केतु द्वारा शासित एवं निरृति देवता वाला, इसके जातक खोजी एवं दार्शनिक होते हैं, असत्य को उखाड़ने एवं मूल सत्य खोजने की ओर आकर्षित, चाहे उथल-पुथल से ही क्यों न हो।
मुख्य तथ्य
| स्वामी ग्रह | केतु |
| देवता | निरृति (विनाश की देवी) |
| प्रतीक | बँधी जड़ों का गुच्छा |
| गण | राक्षस |
| लिंग | नपुंसक |
| नाड़ी | आदि (वात) |
| योनि (पशु) | श्वान |
| राशि एवं विस्तार | 0°00'–13°20' धनु |
मुख्य लक्षण
- खोजी, गहन एवं दार्शनिक
- स्पष्टवादी एवं सत्य-अन्वेषी
- निर्लिप्त एवं अनुसंधान-प्रवृत्त
- मुँहफट या उथल-पुथल से गुज़रने वाला हो सकता है
करियर एवं शक्तियाँ
अनुसंधान, दर्शन एवं अध्यात्म, चिकित्सा एवं जड़ी-बूटी, गूढ़ विद्या, तथा जड़ तक खोदने वाला कोई भी क्षेत्र मूल के अनुकूल है।
उपाय
- स्वामी ग्रह केतु को बल दें (देखें केतु के उपाय)
- नक्षत्र देवता निरृति का पूजन करें
- नक्षत्र मंत्र का जाप करें एवं प्रति मास अपने जन्म-नक्षत्र दिवस पर उसका सम्मान करें