पुनर्वसु नक्षत्र
पुनर्वसु का अर्थ 'प्रकाश की वापसी' है — नवीनीकरण, आशावाद एवं सुरक्षित वापसी का तारा। गुरु द्वारा शासित एवं असीम माता अदिति वाला, इसके जातक ज्ञानी, उदार, आशावान एवं किसी भी बाधा से उबरने में सक्षम होते हैं।
मुख्य तथ्य
| स्वामी ग्रह | गुरु |
| देवता | अदिति (देवों की माता) |
| प्रतीक | धनुष एवं तरकश |
| गण | देव |
| लिंग | पुरुष |
| नाड़ी | आदि (वात) |
| योनि (पशु) | मार्जार |
| राशि एवं विस्तार | 20°00' मिथुन – 3°20' कर्क |
मुख्य लक्षण
- आशावादी, ज्ञानी एवं उदार
- लचीला — बाधाओं से उबरने वाला
- संतुष्ट, दार्शनिक एवं पोषक
- एकाग्रता की कमी या अति-सहज हो सकता है
करियर एवं शक्तियाँ
अध्यापन, दर्शन एवं अध्यात्म, आतिथ्य, प्रकाशन, यात्रा एवं परामर्श पुनर्वसु के ज्ञान एवं ऊष्मा के अनुकूल हैं।
उपाय
- स्वामी ग्रह गुरु को बल दें (देखें गुरु के उपाय)
- नक्षत्र देवता अदिति का पूजन करें
- नक्षत्र मंत्र का जाप करें एवं प्रति मास अपने जन्म-नक्षत्र दिवस पर उसका सम्मान करें