पुष्य नक्षत्र
पुष्य को समस्त नक्षत्रों में सर्वाधिक शुभ माना जाता है — पोषण, अध्यात्म एवं सहारे का तारा। शनि द्वारा शासित एवं बृहस्पति देवता वाला, इसके जातक देखभाल करने वाले, कर्तव्यनिष्ठ, धार्मिक एवं दूसरों का गहरा सहारा होते हैं।
मुख्य तथ्य
| स्वामी ग्रह | शनि |
| देवता | बृहस्पति (देवगुरु) |
| प्रतीक | गाय का थन / कमल |
| गण | देव |
| लिंग | पुरुष |
| नाड़ी | मध्य (पित्त) |
| योनि (पशु) | मेष |
| राशि एवं विस्तार | 3°20'–16°40' कर्क |
मुख्य लक्षण
- पोषक, देखभाल करने वाला एवं कर्तव्यनिष्ठ
- आध्यात्मिक एवं सिद्धांतवादी
- भरोसेमंद एवं सहारा देने वाला
- रूढ़िवादी या अति-रक्षात्मक हो सकता है
करियर एवं शक्तियाँ
अध्यापन, पौरोहित्य, स्वास्थ्य, भोजन एवं पोषण, समाज-सेवा, सरकारी सेवा एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन पुष्य के पोषक स्वभाव के अनुकूल हैं।
उपाय
- स्वामी ग्रह शनि को बल दें (देखें शनि के उपाय)
- नक्षत्र देवता बृहस्पति का पूजन करें
- नक्षत्र मंत्र का जाप करें एवं प्रति मास अपने जन्म-नक्षत्र दिवस पर उसका सम्मान करें