गुरु ग्रह (Jupiter)

गुरु (बृहस्पति) महान शुभ ग्रह एवं देवगुरु है — ज्ञान, विद्या, धन, संतान, धर्म, नीति एवं सौभाग्य का कारक। बलवान गुरु कुंडली की सर्वाधिक कल्याणकारी स्थिति है।

मुख्य तथ्य

संस्कृत नामGuru / Brihaspati
कारकज्ञान, धन, संतान, धर्म
स्वभावशुभ (सर्वाधिक)
तत्वआकाश
लिंगपुरुष
स्वराशिधनु, मीन
उच्चकर्क (5°)
नीचमकर (5°)
मूलत्रिकोणधनु 0°–10°
मित्रसूर्य, चंद्र, मंगल
शत्रुबुध, शुक्र
दिग्बलप्रथम भाव (पूर्व)
दिनगुरुवार
रत्नपुखराज
देवताबृहस्पति / विष्णु
दशा अवधि16 वर्ष

जब यह बलवान / शुभ स्थित हो

  • ज्ञान, उत्तम निर्णय एवं आशावाद
  • धन, समृद्धि एवं उदारता
  • संतान एवं उत्तम गुरुओं का आशीर्वाद
  • श्रद्धा, नैतिकता एवं समाज में सम्मान

जब यह निर्बल या पीड़ित हो

  • दुर्बल निर्णय या भ्रमित श्रद्धा
  • धन या संतान में बाधा
  • भार, यकृत या मधुमेह की प्रवृत्ति
  • मार्गदर्शन एवं दिशा का अभाव

करियर एवं जीवन क्षेत्र

गुरु अध्यापन, विधि, वित्त, बैंकिंग, पौरोहित्य, परामर्श, प्रकाशन तथा सलाहकार कार्यों को अनुकूल बनाता है — जहाँ ज्ञान एवं नीति का मूल्य हो।

स्वामी नक्षत्र

विंशोत्तरी दशा पद्धति में गुरु 27 नक्षत्रों में से तीन का स्वामी है: पुनर्वसु, विशाखा, पूर्व भाद्रपद। इन नक्षत्रों में स्थित ग्रह एवं चंद्रमा गुरु का स्वभाव धारण करते हैं एवं इसकी दशा आरंभ करते हैं।

उपाय

  • गुरुवार को विष्णु/गुरु पूजन करें
  • हल्दी, चना दाल एवं पीली वस्तुएँ दान करें
  • गुरुजनों एवं बड़ों का सम्मान करें
  • कुंडली पुष्टि के बाद ही पुखराज धारण करें