मंगल ग्रह (Mars)
मंगल सेनापति है — ऊर्जा, साहस, उत्साह, बल, भाई-बहन (विशेषकर भाई), भूमि एवं संपत्ति का कारक। यह कर्म, प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष-शक्ति का स्वामी है; मांगलिक (मंगल दोष) विश्लेषण इसकी स्थिति पर आधारित है।
मुख्य तथ्य
| संस्कृत नाम | Mangal |
| कारक | ऊर्जा, साहस, भाई-बहन, भूमि |
| स्वभाव | पाप |
| तत्व | अग्नि |
| लिंग | पुरुष |
| स्वराशि | मेष, वृश्चिक |
| उच्च | मकर (28°) |
| नीच | कर्क (28°) |
| मूलत्रिकोण | मेष 0°–12° |
| मित्र | सूर्य, चंद्र, गुरु |
| शत्रु | बुध |
| दिग्बल | दशम भाव (दक्षिण) |
| दिन | मंगलवार |
| रत्न | मूँगा |
| देवता | कार्तिकेय / हनुमान |
| दशा अवधि | 7 वर्ष |
जब यह बलवान / शुभ स्थित हो
- साहस, उत्साह एवं शारीरिक सहनशक्ति
- कर्म एवं प्रतिस्पर्धा में नेतृत्व
- भूमि, संपत्ति एवं तकनीकी कौशल से लाभ
- अनुशासन एवं रक्षात्मक बल
जब यह निर्बल या पीड़ित हो
- क्रोध, आवेग एवं टकराव
- दुर्घटना, चोट, कटना या जलना
- भाई-बहनों से विवाद
- रक्तचाप या सूजन संबंधी समस्याएँ
करियर एवं जीवन क्षेत्र
मंगल सेना, पुलिस, शल्य चिकित्सा, अभियांत्रिकी, खेल, भूमि-भवन तथा साहस, तकनीकी कौशल या शारीरिक ऊर्जा माँगने वाले कार्यों को अनुकूल बनाता है।
स्वामी नक्षत्र
विंशोत्तरी दशा पद्धति में मंगल 27 नक्षत्रों में से तीन का स्वामी है: मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा। इन नक्षत्रों में स्थित ग्रह एवं चंद्रमा मंगल का स्वभाव धारण करते हैं एवं इसकी दशा आरंभ करते हैं।
उपाय
- मंगलवार को हनुमान चालीसा पढ़ें
- मसूर दाल एवं गुड़ दान करें
- क्रोध पर नियंत्रण; वीरों एवं सैनिकों की सहायता करें
- कुंडली पुष्टि के बाद ही मूँगा धारण करें