चंद्र ग्रह (Moon)
चंद्र मनःकारक है — मन का कारक। यह भावनाओं, अनुभूतियों, माता, सुख, जनता एवं दैनिक जीवन के प्रवाह का स्वामी है। वैदिक ज्योतिष में चंद्र राशि ही फलादेश की प्रमुख राशि है।
मुख्य तथ्य
| संस्कृत नाम | Chandra |
| कारक | मन, भावनाएँ, माता, सुख |
| स्वभाव | शुभ (वृद्धिमान) |
| तत्व | जल |
| लिंग | स्त्री |
| स्वराशि | कर्क |
| उच्च | वृषभ (3°) |
| नीच | वृश्चिक (3°) |
| मूलत्रिकोण | वृषभ 3°–30° |
| मित्र | सूर्य, बुध |
| शत्रु | कोई नहीं |
| दिग्बल | चतुर्थ भाव (उत्तर) |
| दिन | सोमवार |
| रत्न | मोती |
| देवता | पार्वती / वरुण |
| दशा अवधि | 10 वर्ष |
जब यह बलवान / शुभ स्थित हो
- शांत, संतुष्ट एवं ग्रहणशील मन
- भावनात्मक संतुलन एवं लोकप्रियता
- माता से निकटता; घर में सुख
- उत्तम अंतर्ज्ञान एवं कल्पना
जब यह निर्बल या पीड़ित हो
- मनोदशा-परिवर्तन, चिंता या बेचैनी
- भावनात्मक असुरक्षा
- माता से कठिनाइयाँ
- नींद या जल-तत्व संबंधी स्वास्थ्य समस्याएँ
करियर एवं जीवन क्षेत्र
चंद्र नर्सिंग एवं स्वास्थ्य, आतिथ्य, खानपान, जनसंपर्क, मनोविज्ञान तथा तरल, जनता या मन से जुड़े कार्यों को अनुकूल बनाता है।
स्वामी नक्षत्र
विंशोत्तरी दशा पद्धति में चंद्र 27 नक्षत्रों में से तीन का स्वामी है: रोहिणी, हस्त, श्रवण। इन नक्षत्रों में स्थित ग्रह एवं चंद्रमा चंद्र का स्वभाव धारण करते हैं एवं इसकी दशा आरंभ करते हैं।
उपाय
- सोमवार को शिव/पार्वती पूजन करें
- दूध, चावल एवं श्वेत पुष्प अर्पित करें
- माता की सेवा एवं देखभाल करें
- कुंडली पुष्टि के बाद ही मोती धारण करें