राहु ग्रह (Rahu)
राहु, चंद्रमा का उत्तर बिंदु, छाया ग्रह है — सांसारिक महत्वाकांक्षा, आसक्ति, विदेश एवं विदेशी संस्कृति, प्रौद्योगिकी, माया एवं आकस्मिक, अपरंपरागत लाभ का कारक। यह जिसे स्पर्श करे उसे बढ़ाता है एवं मोटे तौर पर शनि जैसा आचरण करता है।
मुख्य तथ्य
| संस्कृत नाम | Rahu |
| कारक | महत्वाकांक्षा, विदेश, आसक्ति, आकस्मिक लाभ |
| स्वभाव | पाप (छाया) |
| तत्व | वायु |
| लिंग | — |
| स्वराशि | कुंभ का सह-स्वामी (कुछ मत) |
| उच्च | वृषभ / मिथुन (मतभेद) |
| नीच | वृश्चिक / धनु (मतभेद) |
| मूलत्रिकोण | — |
| मित्र | शुक्र, शनि, बुध |
| शत्रु | सूर्य, चंद्र, मंगल |
| दिग्बल | — |
| दिन | शनिवार |
| रत्न | गोमेद |
| देवता | दुर्गा |
| दशा अवधि | 18 वर्ष |
जब यह बलवान / शुभ स्थित हो
- सांसारिक सफलता, यश एवं आकस्मिक लाभ
- प्रौद्योगिकी एवं विदेशी विषयों में कौशल
- साहसी महत्वाकांक्षा एवं अपरंपरागत सोच
- राजनीति, मीडिया या अनुसंधान में उन्नति
जब यह निर्बल या पीड़ित हो
- भ्रम, व्यग्रता एवं माया
- आसक्ति, व्यसन या कलंक
- आकस्मिक, अप्रत्याशित उथल-पुथल
- रहस्यमय या कठिन-निदान रोग
करियर एवं जीवन क्षेत्र
राहु प्रौद्योगिकी, विमानन, विदेश-व्यापार एवं यात्रा, अनुसंधान, चलचित्र एवं मीडिया, सट्टा तथा किसी नए, अपरंपरागत या अत्याधुनिक क्षेत्र को अनुकूल बनाता है।
स्वामी नक्षत्र
विंशोत्तरी दशा पद्धति में राहु 27 नक्षत्रों में से तीन का स्वामी है: आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा। इन नक्षत्रों में स्थित ग्रह एवं चंद्रमा राहु का स्वभाव धारण करते हैं एवं इसकी दशा आरंभ करते हैं।
उपाय
- दुर्गा पूजन करें; राहु मंत्र या दुर्गा सप्तशती पढ़ें
- शनिवार को कंबल, सरसों तेल एवं तिल दान करें
- उपेक्षितों की सेवा करें; नशे से बचें
- कुंडली पुष्टि के बाद ही गोमेद धारण करें