शनि ग्रह (Saturn)
शनि महान गुरु एवं न्यायाधीश है — अनुशासन, परिश्रम, कर्म, विलंब, सहनशीलता, आयु, सेवक एवं जनसामान्य का कारक। धीमा किंतु न्यायप्रिय शनि धैर्य को पुरस्कृत एवं शॉर्टकट को दंडित करता है; साढ़े साती इसका गोचर काल है।
मुख्य तथ्य
| संस्कृत नाम | Shani |
| कारक | अनुशासन, कर्म, विलंब, आयु |
| स्वभाव | पाप |
| तत्व | वायु |
| लिंग | नपुंसक |
| स्वराशि | मकर, कुंभ |
| उच्च | तुला (20°) |
| नीच | मेष (20°) |
| मूलत्रिकोण | कुंभ 0°–20° |
| मित्र | बुध, शुक्र |
| शत्रु | सूर्य, चंद्र, मंगल |
| दिग्बल | सप्तम भाव (पश्चिम) |
| दिन | शनिवार |
| रत्न | नीलम |
| देवता | शनि / हनुमान |
| दशा अवधि | 19 वर्ष |
जब यह बलवान / शुभ स्थित हो
- अनुशासन, धैर्य एवं सहनशीलता
- परिश्रम से स्थिर, स्थायी सफलता
- जन, श्रम या बड़ी व्यवस्थाओं पर अधिकार
- दीर्घायु एवं परिपक्वता
जब यह निर्बल या पीड़ित हो
- विलंब, बाधाएँ एवं दीर्घकालीन संघर्ष
- अवसाद, भय या एकाकीपन
- जोड़, अस्थि, दाँत या तंत्रिका की समस्याएँ
- सेवकों या अधीनस्थों से हानि
करियर एवं जीवन क्षेत्र
शनि श्रम एवं खनन, अभियांत्रिकी, लौह-इस्पात, तेल, कृषि, विधि, सरकारी सेवा तथा चरण-दर-चरण बनने वाले दीर्घ, अनुशासित करियर को अनुकूल बनाता है।
स्वामी नक्षत्र
विंशोत्तरी दशा पद्धति में शनि 27 नक्षत्रों में से तीन का स्वामी है: पुष्य, अनुराधा, उत्तर भाद्रपद। इन नक्षत्रों में स्थित ग्रह एवं चंद्रमा शनि का स्वभाव धारण करते हैं एवं इसकी दशा आरंभ करते हैं।
उपाय
- निर्धनों, वृद्धों एवं श्रमिकों की सेवा करें
- शनिवार को सरसों तेल का दीपक जलाएँ; शनि स्तोत्र पढ़ें
- काले तिल, लोहा, सरसों तेल एवं कंबल दान करें
- सावधानीपूर्वक कुंडली पुष्टि के बाद ही नीलम धारण करें