सूर्य ग्रह (Sun)
सूर्य ग्रहों का राजा है — नैसर्गिक क्रम में आत्मकारक, जो आत्मा, आत्मविश्वास, अहं, इच्छाशक्ति, ओज, पिता, सरकार एवं समस्त अधिकार का कारक है। बलवान सूर्य नेतृत्व, गरिमा एवं स्वास्थ्य देता है।
मुख्य तथ्य
| संस्कृत नाम | Surya |
| कारक | आत्मा, अहं, पिता, अधिकार, ओज |
| स्वभाव | पाप (मृदु) |
| तत्व | अग्नि |
| लिंग | पुरुष |
| स्वराशि | सिंह |
| उच्च | मेष (10°) |
| नीच | तुला (10°) |
| मूलत्रिकोण | सिंह 0°–20° |
| मित्र | चंद्र, मंगल, गुरु |
| शत्रु | शुक्र, शनि |
| दिग्बल | दशम भाव (दक्षिण) |
| दिन | रविवार |
| रत्न | माणिक |
| देवता | सूर्य / शिव |
| दशा अवधि | 6 वर्ष |
जब यह बलवान / शुभ स्थित हो
- आत्मविश्वास, नेतृत्व एवं प्रभावशाली उपस्थिति
- उत्तम स्वास्थ्य एवं ओज
- सरकार, अधिकार एवं पिता से सफलता
- ईमानदारी एवं दृढ़ आत्म-भाव
जब यह निर्बल या पीड़ित हो
- आत्मविश्वास की कमी या बढ़ा हुआ अहं
- अधिकार या पिता से मतभेद
- क्षीण ओज, नेत्र या हृदय की समस्याएँ
- आहत स्वाभिमान एवं मान्यता का अभाव
करियर एवं जीवन क्षेत्र
सूर्य सरकारी सेवा, प्रशासन, राजनीति, नेतृत्व, चिकित्सा तथा अधिकार एवं प्रतिष्ठा वाले कार्यों को अनुकूल बनाता है।
स्वामी नक्षत्र
विंशोत्तरी दशा पद्धति में सूर्य 27 नक्षत्रों में से तीन का स्वामी है: कृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा। इन नक्षत्रों में स्थित ग्रह एवं चंद्रमा सूर्य का स्वभाव धारण करते हैं एवं इसकी दशा आरंभ करते हैं।
उपाय
- सूर्योदय पर सूर्य को अर्घ्य दें
- रविवार को आदित्य हृदय स्तोत्र पढ़ें
- पिता एवं बड़ों का सम्मान करें; गेहूँ/गुड़ दान करें
- कुंडली पुष्टि के बाद ही माणिक धारण करें