शुक्र ग्रह (Venus)
शुक्र दैत्यगुरु एवं प्रेम, विवाह, सौंदर्य, विलासिता, सुख, वाहन, कला एवं परिष्कार का कारक है। यह पुरुष के लिए पत्नी का तथा सभी के लिए सुख एवं संबंधों का कारक है।
मुख्य तथ्य
| संस्कृत नाम | Shukra |
| कारक | प्रेम, विवाह, विलासिता, कला |
| स्वभाव | शुभ |
| तत्व | जल |
| लिंग | स्त्री |
| स्वराशि | वृषभ, तुला |
| उच्च | मीन (27°) |
| नीच | कन्या (27°) |
| मूलत्रिकोण | तुला 0°–15° |
| मित्र | बुध, शनि |
| शत्रु | सूर्य, चंद्र |
| दिग्बल | चतुर्थ भाव (उत्तर) |
| दिन | शुक्रवार |
| रत्न | हीरा |
| देवता | लक्ष्मी / शुक्राचार्य |
| दशा अवधि | 20 वर्ष |
जब यह बलवान / शुभ स्थित हो
- सुखी प्रेम एवं वैवाहिक जीवन
- सौंदर्य, आकर्षण एवं कलात्मक प्रतिभा
- सुख, विलासिता एवं वाहन
- उत्तम रुचि एवं परिष्कृत सुख
जब यह निर्बल या पीड़ित हो
- संबंध एवं वैवाहिक समस्याएँ
- सुखों में अति-भोग
- जनन या मूत्र संबंधी समस्याएँ
- सुख एवं परिष्कार का अभाव
करियर एवं जीवन क्षेत्र
शुक्र कला, संगीत, चलचित्र, फ़ैशन, डिज़ाइन, सौंदर्य, आतिथ्य, विलासिता-वस्तुओं तथा संबंध, सौंदर्य या मनोरंजन से जुड़े कार्यों को अनुकूल बनाता है।
स्वामी नक्षत्र
विंशोत्तरी दशा पद्धति में शुक्र 27 नक्षत्रों में से तीन का स्वामी है: भरणी, पूर्व फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा। इन नक्षत्रों में स्थित ग्रह एवं चंद्रमा शुक्र का स्वभाव धारण करते हैं एवं इसकी दशा आरंभ करते हैं।
उपाय
- शुक्रवार को लक्ष्मी पूजन करें
- श्वेत मिष्ठान्न, दही एवं इत्र दान करें
- स्त्रियों, जीवनसाथी एवं कलाकारों का सम्मान करें
- कुंडली पुष्टि के बाद ही हीरा धारण करें