कर्क राशि (Cancer)
कर्क (Cancer) चंद्र द्वारा शासित जल तत्व की राशि है, जिसका प्रतीक केकड़ा है। जिनकी चंद्र राशि (या लग्न) कर्क होती है, वे सहानुभूति एवं देखभाल, प्रियजनों के प्रति निष्ठा जैसे गुणों के लिए जाने जाते हैं। यहाँ वैदिक ज्योतिष में कर्क राशि के व्यक्तित्व, प्रेम, करियर, स्वास्थ्य एवं उपायों का संपूर्ण विवरण है।
मुख्य तथ्य
| प्रतीक | केकड़ा |
| तत्व | जल |
| गुण | चर |
| स्वामी ग्रह | चंद्र |
| सूर्य-संक्रमण (लगभग) | 16 जुलाई – 16 अगस्त |
| शुभ रंग | श्वेत / रजत |
| शुभ अंक | 2 |
| शुभ दिन | सोमवार |
| रत्न | मोती |
| देवता | पार्वती / चंद्र |
| अनुकूल राशियाँ | वृश्चिक, मीन, वृषभ, कन्या |
व्यक्तित्व एवं स्वभाव
- भावुक, पोषक एवं अंतर्ज्ञानी
- घर एवं परिवार से गहरा लगाव
- देखभाल करने वाला एवं रक्षात्मक
- मनोदशा-परिवर्तनशील एवं संवेदनशील
शक्तियाँ
- सहानुभूति एवं देखभाल
- प्रियजनों के प्रति निष्ठा
- प्रबल अंतर्ज्ञान
- भावनात्मक गहराई
कमज़ोरियाँ
- मनोदशा-परिवर्तन
- अति-संवेदनशीलता
- अतीत से चिपकना
- असुरक्षा
प्रेम एवं संबंध
कर्क कोमलता एवं रक्षात्मकता से प्रेम करता है, भावनात्मक सुरक्षा एवं घर का भाव चाहता है। समर्पण से देता है और प्रत्येक स्नेह याद रखता है, पर आश्वासन चाहिए और आहत होने पर अपने कवच में सिमट जाता है।
करियर एवं धन
चंद्रमा से शासित कर्क देखभाल एवं जनसंपर्क वाले क्षेत्रों — स्वास्थ्य, आतिथ्य, अध्यापन, खानपान, भूमि-भवन, मानव संसाधन में उत्कृष्ट होता है। जनभावना एवं व्यापार की तीव्र समझ भी रखता है।
स्वास्थ्य
कर्क वक्ष, आमाशय एवं पाचन का स्वामी है; अम्लता, जल-संचय एवं तनावजनित रोगों का ध्यान रखें। भावनात्मक संतुलन शारीरिक स्वास्थ्य का केंद्र है।
अनुकूलता
कर्क राशि प्रायः वृश्चिक, मीन, वृषभ, कन्या के साथ सर्वाधिक सामंजस्य रखती है। तथापि अनुकूलता पूरी कुंडली पर निर्भर करती है — विवाह हेतु केवल राशि नहीं, अष्टकूट गुण मिलान अवश्य देखें।
स्वामी ग्रह एवं नक्षत्र
कर्क राशि का स्वामी चंद्र है, जिसका बल एवं स्थिति राशि की अभिव्यक्ति तय करते हैं। यह पुनर्वसु (चतुर्थ चरण), पुष्य, आश्लेषा नक्षत्रों में फैली है, जो इसके अर्थ को और सूक्ष्म करते हैं। व्यक्तिगत चित्र हेतु राशि को उसके स्वामी एवं नक्षत्रों सहित पढ़ें।
उपाय
- चंद्रमा को बल दें: सोमवार को शिव/पार्वती पूजन करें
- चावल, दूध एवं श्वेत पुष्प अर्पित करें; माता की सेवा करें
- कुंडली पुष्टि के बाद ही मोती धारण करें