मीन राशि (Pisces)
मीन (Pisces) गुरु द्वारा शासित जल तत्व की राशि है, जिसका प्रतीक मछली है। जिनकी चंद्र राशि (या लग्न) मीन होती है, वे करुणा एवं सहानुभूति, सृजनशीलता एवं कल्पना जैसे गुणों के लिए जाने जाते हैं। यहाँ वैदिक ज्योतिष में मीन राशि के व्यक्तित्व, प्रेम, करियर, स्वास्थ्य एवं उपायों का संपूर्ण विवरण है।
मुख्य तथ्य
| प्रतीक | मछली |
| तत्व | जल |
| गुण | द्विस्वभाव |
| स्वामी ग्रह | गुरु |
| सूर्य-संक्रमण (लगभग) | 14 मार्च – 13 अप्रैल |
| शुभ रंग | पीला |
| शुभ अंक | 3 |
| शुभ दिन | गुरुवार |
| रत्न | पुखराज |
| देवता | विष्णु |
| अनुकूल राशियाँ | कर्क, वृश्चिक, वृषभ, मकर |
व्यक्तित्व एवं स्वभाव
- करुणामय, अंतर्ज्ञानी एवं कल्पनाशील
- कोमल, कलात्मक एवं आध्यात्मिक
- निःस्वार्थ एवं सहानुभूतिशील
- पलायनवादी एवं अति-संवेदनशील
शक्तियाँ
- करुणा एवं सहानुभूति
- सृजनशीलता एवं कल्पना
- आध्यात्मिक गहराई
- अनुकूलनशीलता
कमज़ोरियाँ
- पलायन
- अति-संवेदनशीलता
- अनिर्णय
- सहज प्रभावित होना
प्रेम एवं संबंध
मीन निःस्वार्थ एवं रोमांटिक ढंग से प्रेम करता है, साथी में गहराई से घुल-मिल जाता है और निःशर्त देता है। कोमल एवं समर्पित होता है पर उपेक्षा से बचाव चाहिए; कोमल, सच्चा प्रेम उसका जादू जगाता है।
करियर एवं धन
गुरु से शासित मीन कला, संगीत, चलचित्र, चिकित्सा, अध्यात्म, दान, मनोविज्ञान तथा कल्पना या सेवा आधारित कार्यों में उत्कृष्ट होता है। सहानुभूति एवं सृजनशीलता को अर्थ में ढालता है।
स्वास्थ्य
मीन पैरों एवं लसिका तंत्र का स्वामी है; पैरों की समस्याओं, सूजन एवं संवेदनशीलताओं का ध्यान रखें। भावनात्मक सीमाएँ एवं विश्राम उनकी कोमल प्रकृति की रक्षा करते हैं।
अनुकूलता
मीन राशि प्रायः कर्क, वृश्चिक, वृषभ, मकर के साथ सर्वाधिक सामंजस्य रखती है। तथापि अनुकूलता पूरी कुंडली पर निर्भर करती है — विवाह हेतु केवल राशि नहीं, अष्टकूट गुण मिलान अवश्य देखें।
स्वामी ग्रह एवं नक्षत्र
मीन राशि का स्वामी गुरु है, जिसका बल एवं स्थिति राशि की अभिव्यक्ति तय करते हैं। यह पूर्व भाद्रपद (चतुर्थ चरण), उत्तर भाद्रपद, रेवती नक्षत्रों में फैली है, जो इसके अर्थ को और सूक्ष्म करते हैं। व्यक्तिगत चित्र हेतु राशि को उसके स्वामी एवं नक्षत्रों सहित पढ़ें।
उपाय
- गुरु को बल दें: गुरुवार को विष्णु पूजन करें
- हल्दी, चना दाल एवं पीले मिष्ठान्न अर्पित करें; गुरुजनों का सम्मान करें
- कुंडली पुष्टि के बाद ही पुखराज धारण करें