धनु राशि (Sagittarius)
धनु (Sagittarius) गुरु द्वारा शासित अग्नि तत्व की राशि है, जिसका प्रतीक धनुर्धर है। जिनकी चंद्र राशि (या लग्न) धनु होती है, वे आशावाद एवं ईमानदारी, ज्ञान एवं दूरदृष्टि जैसे गुणों के लिए जाने जाते हैं। यहाँ वैदिक ज्योतिष में धनु राशि के व्यक्तित्व, प्रेम, करियर, स्वास्थ्य एवं उपायों का संपूर्ण विवरण है।
मुख्य तथ्य
| प्रतीक | धनुर्धर |
| तत्व | अग्नि |
| गुण | द्विस्वभाव |
| स्वामी ग्रह | गुरु |
| सूर्य-संक्रमण (लगभग) | 16 दिसंबर – 13 जनवरी |
| शुभ रंग | पीला / स्वर्ण |
| शुभ अंक | 3 |
| शुभ दिन | गुरुवार |
| रत्न | पुखराज |
| देवता | विष्णु / बृहस्पति |
| अनुकूल राशियाँ | मेष, सिंह, तुला, कुंभ |
व्यक्तित्व एवं स्वभाव
- आशावादी, ईमानदार एवं साहसिक
- दार्शनिक एवं स्वतंत्रता-प्रिय
- उदार एवं उत्साही
- मुँहफट एवं बेचैन
शक्तियाँ
- आशावाद एवं ईमानदारी
- ज्ञान एवं दूरदृष्टि
- उदारता
- सीखने का प्रेम
कमज़ोरियाँ
- मुँहफटपन
- बेचैनी
- अति-आत्मविश्वास
- नीरसता से विमुखता
प्रेम एवं संबंध
धनु स्वतंत्रता एवं ईमानदारी से प्रेम करता है, ऐसा साथी चाहता है जो मित्र एवं सहयात्री भी हो। अधिकार-भाव से अधिक स्वतंत्रता एवं सत्य को महत्व देता है; साझा आदर्श एवं विचरण की जगह बंधन को जीवंत रखते हैं।
करियर एवं धन
गुरु से शासित धनु अध्यापन, विधि, दर्शन, धर्म, प्रकाशन, यात्रा, उच्च शिक्षा, प्रशिक्षण एवं परामर्श में उत्कृष्ट होता है। दूसरों को प्रेरित करता है और अर्थपूर्ण एवं व्यापक कार्य पसंद करता है।
स्वास्थ्य
धनु कूल्हों, जाँघों एवं यकृत का स्वामी है; यकृत, भार एवं कूल्हे की समस्याओं का ध्यान रखें, जो प्रायः अति-भोग से होती हैं। नियमित व्यायाम एवं संयम लाभकारी हैं।
अनुकूलता
धनु राशि प्रायः मेष, सिंह, तुला, कुंभ के साथ सर्वाधिक सामंजस्य रखती है। तथापि अनुकूलता पूरी कुंडली पर निर्भर करती है — विवाह हेतु केवल राशि नहीं, अष्टकूट गुण मिलान अवश्य देखें।
स्वामी ग्रह एवं नक्षत्र
धनु राशि का स्वामी गुरु है, जिसका बल एवं स्थिति राशि की अभिव्यक्ति तय करते हैं। यह मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा (प्रथम चरण) नक्षत्रों में फैली है, जो इसके अर्थ को और सूक्ष्म करते हैं। व्यक्तिगत चित्र हेतु राशि को उसके स्वामी एवं नक्षत्रों सहित पढ़ें।
उपाय
- गुरु को बल दें: गुरुवार को विष्णु/गुरु पूजन करें
- चना दाल, हल्दी एवं पीले मिष्ठान्न अर्पित करें; गुरुजनों का सम्मान करें
- कुंडली पुष्टि के बाद ही पुखराज धारण करें