वृश्चिक राशि (Scorpio)
वृश्चिक (Scorpio) मंगल द्वारा शासित जल तत्व की राशि है, जिसका प्रतीक बिच्छू है। जिनकी चंद्र राशि (या लग्न) वृश्चिक होती है, वे इच्छाशक्ति एवं गहराई, निष्ठा एवं साहस जैसे गुणों के लिए जाने जाते हैं। यहाँ वैदिक ज्योतिष में वृश्चिक राशि के व्यक्तित्व, प्रेम, करियर, स्वास्थ्य एवं उपायों का संपूर्ण विवरण है।
मुख्य तथ्य
| प्रतीक | बिच्छू |
| तत्व | जल |
| गुण | स्थिर |
| स्वामी ग्रह | मंगल |
| सूर्य-संक्रमण (लगभग) | 16 नवंबर – 15 दिसंबर |
| शुभ रंग | लाल / मैरून |
| शुभ अंक | 9 |
| शुभ दिन | मंगलवार |
| रत्न | मूँगा |
| देवता | कार्तिकेय / दुर्गा |
| अनुकूल राशियाँ | कर्क, मीन, कन्या, मकर |
व्यक्तित्व एवं स्वभाव
- तीव्र, भावुक एवं दृढ़-संकल्प
- गहन, रहस्यमय एवं सूक्ष्मदर्शी
- अत्यंत निष्ठावान
- विश्वासघात पर ईर्ष्यालु एवं प्रतिशोधी
शक्तियाँ
- इच्छाशक्ति एवं गहराई
- निष्ठा एवं साहस
- अंतर्दृष्टि एवं एकाग्रता
- सहनशीलता
कमज़ोरियाँ
- ईर्ष्या एवं अधिकार-भाव
- गोपनीयता
- प्रतिशोध
- आसक्ति
प्रेम एवं संबंध
वृश्चिक अद्वितीय तीव्रता एवं पूर्ण समर्पण से प्रेम करता है, आत्मिक गहराई का बंधन चाहता है। भावुक एवं रक्षात्मक होता है पर अधिकार-भाव एवं ईर्ष्या रख सकता है; विश्वास एवं भावनात्मक ईमानदारी उसके लिए सर्वोपरि हैं।
करियर एवं धन
मंगल से शासित वृश्चिक अनुसंधान, जाँच, शल्य चिकित्सा, फोरेंसिक, मनोविज्ञान, गूढ़ विद्या, रक्षा तथा छिपे सत्य खोजने या दृढ़ता माँगने वाले क्षेत्रों में उत्कृष्ट होता है।
स्वास्थ्य
वृश्चिक जनन एवं उत्सर्जन अंगों का स्वामी है; संबंधित रोगों तथा दमित तीव्रता से तनाव का ध्यान रखें। भावनाओं के स्वस्थ निकास आवश्यक हैं।
अनुकूलता
वृश्चिक राशि प्रायः कर्क, मीन, कन्या, मकर के साथ सर्वाधिक सामंजस्य रखती है। तथापि अनुकूलता पूरी कुंडली पर निर्भर करती है — विवाह हेतु केवल राशि नहीं, अष्टकूट गुण मिलान अवश्य देखें।
स्वामी ग्रह एवं नक्षत्र
वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है, जिसका बल एवं स्थिति राशि की अभिव्यक्ति तय करते हैं। यह विशाखा (चतुर्थ चरण), अनुराधा, ज्येष्ठा नक्षत्रों में फैली है, जो इसके अर्थ को और सूक्ष्म करते हैं। व्यक्तिगत चित्र हेतु राशि को उसके स्वामी एवं नक्षत्रों सहित पढ़ें।
उपाय
- मंगल को बल दें: मंगलवार को हनुमान चालीसा पढ़ें
- मसूर दाल दान करें; क्रोध पर नियंत्रण एवं वैर त्यागें
- कुंडली पुष्टि के बाद ही मूँगा धारण करें