वृषभ राशि (Taurus)
वृषभ (Taurus) शुक्र द्वारा शासित पृथ्वी तत्व की राशि है, जिसका प्रतीक बैल है। जिनकी चंद्र राशि (या लग्न) वृषभ होती है, वे दृढ़ता एवं विश्वसनीयता, व्यावहारिक आर्थिक समझ जैसे गुणों के लिए जाने जाते हैं। यहाँ वैदिक ज्योतिष में वृषभ राशि के व्यक्तित्व, प्रेम, करियर, स्वास्थ्य एवं उपायों का संपूर्ण विवरण है।
मुख्य तथ्य
| प्रतीक | बैल |
| तत्व | पृथ्वी |
| गुण | स्थिर |
| स्वामी ग्रह | शुक्र |
| सूर्य-संक्रमण (लगभग) | 15 मई – 14 जून |
| शुभ रंग | श्वेत / हल्के रंग |
| शुभ अंक | 6 |
| शुभ दिन | शुक्रवार |
| रत्न | हीरा / सफ़ेद पुखराज |
| देवता | लक्ष्मी |
| अनुकूल राशियाँ | कन्या, मकर, कर्क, मीन |
व्यक्तित्व एवं स्वभाव
- धैर्यवान, स्थिर एवं भरोसेमंद
- सुख, सौंदर्य एवं भोजन का प्रेमी
- निष्ठावान एवं व्यावहारिक
- निर्णय के बाद हठी
शक्तियाँ
- दृढ़ता एवं विश्वसनीयता
- व्यावहारिक आर्थिक समझ
- निष्ठा
- दबाव में शांति
कमज़ोरियाँ
- हठ
- परिवर्तन से प्रतिरोध
- अधिकार-भाव
- अति-भोग
प्रेम एवं संबंध
वृषभ गहराई एवं दीर्घकाल तक प्रेम करता है, सुरक्षा, संवेदना एवं अटूट निष्ठा देता है। स्थिरता चाहता है और अधिकार-भाव रख सकता है; धैर्यवान, स्नेही साथी उसकी ऊष्मा जगाता है।
करियर एवं धन
शुक्र से संचालित वृषभ वित्त, बैंकिंग, भूमि-भवन, कृषि, कला, फ़ैशन, भोजन तथा धैर्य एवं गुणवत्ता को पुरस्कृत करने वाले क्षेत्रों में उत्कृष्ट होता है। धन धीरे-धीरे स्थिरता से बनाता है।
स्वास्थ्य
वृषभ गला एवं गर्दन का स्वामी है; गले, थायराइड एवं भार संबंधी समस्याओं का ध्यान रखें। नियमित गतिविधि स्वादिष्ट भोजन एवं आराम-प्रियता को संतुलित करती है।
अनुकूलता
वृषभ राशि प्रायः कन्या, मकर, कर्क, मीन के साथ सर्वाधिक सामंजस्य रखती है। तथापि अनुकूलता पूरी कुंडली पर निर्भर करती है — विवाह हेतु केवल राशि नहीं, अष्टकूट गुण मिलान अवश्य देखें।
स्वामी ग्रह एवं नक्षत्र
वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है, जिसका बल एवं स्थिति राशि की अभिव्यक्ति तय करते हैं। यह कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा (प्रथम–द्वितीय चरण) नक्षत्रों में फैली है, जो इसके अर्थ को और सूक्ष्म करते हैं। व्यक्तिगत चित्र हेतु राशि को उसके स्वामी एवं नक्षत्रों सहित पढ़ें।
उपाय
- शुक्र को बल दें: शुक्रवार को लक्ष्मी पूजन करें
- श्वेत मिष्ठान्न/दही दान करें; स्त्रियों एवं कलाकारों का सम्मान करें
- कुंडली पुष्टि के बाद ही हीरा/सफ़ेद पुखराज धारण करें