प्रदोष व्रत 2028

स्थान:
वर्ष
20272028
पर्वतिथि
सोम प्रदोष (शुक्ल)सोमवार, 10 जनवरी 2028
सोम प्रदोष (कृष्ण)सोमवार, 24 जनवरी 2028
भौम प्रदोष (शुक्ल)मंगलवार, 8 फ़रवरी 2028
सौम्य प्रदोष (कृष्ण)बुधवार, 23 फ़रवरी 2028
गुरु प्रदोष (शुक्ल)गुरुवार, 9 मार्च 2028
गुरु प्रदोष (कृष्ण)गुरुवार, 23 मार्च 2028
भृगु प्रदोष (शुक्ल)शुक्रवार, 7 अप्रैल 2028
शनि प्रदोष (कृष्ण)शनिवार, 22 अप्रैल 2028
भानु प्रदोष (शुक्ल)रविवार, 7 मई 2028
सोम प्रदोष (कृष्ण)सोमवार, 22 मई 2028
सोम प्रदोष (शुक्ल)सोमवार, 5 जून 2028
भौम प्रदोष (कृष्ण)मंगलवार, 20 जून 2028
भौम प्रदोष (शुक्ल)मंगलवार, 4 जुलाई 2028
गुरु प्रदोष (कृष्ण)गुरुवार, 20 जुलाई 2028
गुरु प्रदोष (शुक्ल)गुरुवार, 3 अगस्त 2028
भृगु प्रदोष (कृष्ण)शुक्रवार, 18 अगस्त 2028
भृगु प्रदोष (शुक्ल)शुक्रवार, 1 सितंबर 2028
भानु प्रदोष (कृष्ण)रविवार, 17 सितंबर 2028
भानु प्रदोष (शुक्ल)रविवार, 1 अक्टूबर 2028
सोम प्रदोष (कृष्ण)सोमवार, 16 अक्टूबर 2028
भौम प्रदोष (शुक्ल)मंगलवार, 31 अक्टूबर 2028
भौम प्रदोष (कृष्ण)मंगलवार, 14 नवंबर 2028
सौम्य प्रदोष (शुक्ल)बुधवार, 29 नवंबर 2028
गुरु प्रदोष (कृष्ण)गुरुवार, 14 दिसंबर 2028
भृगु प्रदोष (शुक्ल)शुक्रवार, 29 दिसंबर 2028

महत्व

प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाने वाला प्रदोष व्रत शिव-पार्वती को समर्पित है। सूर्यास्त के आसपास प्रदोष काल में पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

व्रत अपने वार का गुण धारण करता है: सोम प्रदोष (सोमवार) मनोकामना हेतु, भौम प्रदोष (मंगल) आरोग्य हेतु, शनि प्रदोष (शनिवार) संतान हेतु।

विधि

भक्त दिन भर व्रत रखकर प्रदोष काल में शिवलिंग की जल, बेलपत्र एवं दीप से पूजा कर प्रदोष व्रत कथा सुनते हैं। संध्या पूजा के पश्चात पारण होता है।

वर्ष भर के प्रदोष

ऊपर चयनित वर्ष के प्रत्येक प्रदोष उसके वार-आधारित नाम सहित दिए हैं। तिथियाँ देखने हेतु वर्ष चुनें।

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