अमृत सिद्धि योग 2027

स्थान:
वर्ष
तिथिआरंभसमाप्त
शुक्र, 15 जन॰ 202708:51 AM02:21 PM
गुरु, 21 जन॰ 202712:55 AM (22 जन॰)08:48 AM (22 जन॰)
सोम, 15 फ़र॰ 202705:55 PM08:23 AM (16 फ़र॰)
गुरु, 18 फ़र॰ 202711:36 AM08:19 AM (19 फ़र॰)
शनि, 13 मार्च 202712:53 AM (14 मार्च)07:45 AM (14 मार्च)
सोम, 15 मार्च 202707:43 AM10:43 PM
गुरु, 18 मार्च 202707:38 AM05:51 PM
शनि, 10 अप्रैल 202707:01 AM05:23 AM (11 अप्रैल)
रवि, 18 अप्रैल 202707:45 PM06:48 AM (19 अप्रैल)
मंगल, 4 मई 202705:45 PM06:27 AM (5 मई)
शनि, 8 मई 202706:23 AM12:23 PM
रवि, 16 मई 202706:15 AM01:59 AM (17 मई)
बुध, 19 मई 202703:51 AM (20 मई)06:12 AM (20 मई)
मंगल, 1 जून 202706:05 AM02:46 AM (2 जून)
रवि, 13 जून 202706:02 AM07:30 AM
बुध, 16 जून 202710:14 AM06:02 AM (17 जून)
मंगल, 29 जून 202706:05 AM12:18 PM
बुध, 14 जुल॰ 202706:14 AM05:48 PM
शुक्र, 20 अग॰ 202712:09 AM (21 अग॰)06:49 AM (21 अग॰)
शुक्र, 17 सित॰ 202707:14 AM07:15 AM (18 सित॰)
शुक्र, 15 अक्टू॰ 202707:42 AM01:59 PM
सोम, 15 नव॰ 202708:30 PM08:17 AM (16 नव॰)
गुरु, 18 नव॰ 202704:22 PM08:21 AM (19 नव॰)
शनि, 11 दिस॰ 202707:12 AM (12 दिस॰)08:43 AM (12 दिस॰)
सोम, 13 दिस॰ 202708:44 AM03:55 AM (14 दिस॰)
गुरु, 16 दिस॰ 202708:46 AM09:37 PM

अमृत सिद्धि योग क्या है?

अमृत सिद्धि योग पंचांग के सर्वाधिक शुभ योगों में से एक है, जो तब बनता है जब कोई विशेष नक्षत्र अपने निर्धारित वार को पड़ता है। ऐसे दिन यह संयोग उसमें आरंभ किए लगभग हर शुभ कार्य को सिद्धि प्रदान करने वाला कहा जाता है। यह योग उस नक्षत्र के वार के साथ समान भाग तक रहता है — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक।

सात संयोग

अमृत सिद्धि योग इन वार-नक्षत्र युग्मों पर बनता है:

  • रविवार + हस्त
  • सोमवार + मृगशिरा
  • मंगलवार + अश्विनी
  • बुधवार + अनुराधा
  • गुरुवार + पुष्य
  • शुक्रवार + रेवती
  • शनिवार + रोहिणी

ध्यान रखने योग्य

यद्यपि यह व्यापक रूप से शुभ है, परंपरा कुछ सावधानियाँ जोड़ती है: मंगलवार को गृह प्रवेश, गुरुवार को विवाह, तथा शनिवार को इस योग में यात्रा टालें। शेष अधिकांश कार्यों — नए आरंभ, क्रय, निवेश एवं दान — हेतु यह शुभ समय है।

समय कैसे तय होता है

नक्षत्र सर्वत्र एक ही क्षण आरंभ एवं समाप्त होता है, पर वार आपके स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक मापा जाता है — अतः समय आपके स्थान पर निर्भर करता है। समय सही हों, इसके लिए ऊपर अपना नगर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एक अत्यंत शुभ योग जो तब बनता है जब कोई विशेष नक्षत्र अपने निर्धारित वार को पड़ता है। यह उस नक्षत्र के वार के साथ समान भाग (सूर्योदय से अगले सूर्योदय) तक रहता है और लगभग हर शुभ कार्य के आरंभ हेतु अनुकूल है।

रविवार + हस्त, सोमवार + मृगशिरा, मंगलवार + अश्विनी, बुधवार + अनुराधा, गुरुवार + पुष्य, शुक्रवार + रेवती, तथा शनिवार + रोहिणी।

हाँ — परंपरागत रूप से इस योग में मंगलवार को गृह प्रवेश, गुरुवार को विवाह, तथा शनिवार को यात्रा टाली जाती है। शेष यह व्यापक रूप से शुभ है।

हाँ — नक्षत्र सर्वत्र एक ही क्षण आरंभ होता है, पर वार आपके स्थानीय सूर्योदय से मापा जाता है, इसलिए समय स्थान से भिन्न होता है। ऊपर अपना नगर चुनें।

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