गृह प्रवेश संस्कार
नए घर में शुभ लग्न एवं तिथि में प्रवेश शांति, सुख एवं समृद्धि लाता है, ऐसा माना जाता है। गृह प्रवेश शुभ मासों तक सीमित है तथा चातुर्मास (आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन) एवं पौष में निषिद्ध है, इसीलिए वे मास सूची में नहीं हैं।
यहाँ प्रयुक्त शास्त्रीय नियम
- मास — माघ, फाल्गुन, चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, कार्तिक एवं मार्गशीर्ष; चातुर्मास एवं पौष वर्जित हैं।
- वार — मंगलवार एवं रविवार को छोड़ सभी दिन।
- तिथि — शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी एवं त्रयोदशी; अमावस्या एवं पूर्णिमा टाली जाती हैं।
- नक्षत्र — गृह प्रवेश हेतु शुभ स्थिर एवं मृदु नक्षत्र (रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती)।
समय आपके नगर पर कैसे निर्भर करता है
प्रत्येक समय वार के वार — सूर्योदय से अगले सूर्योदय — तक सीमित होता है, अतः इसका आरंभ एवं अंत आपके स्थानीय सूर्योदय से बदलता है। सही समय हेतु ऊपर अपना नगर चुनें।