रवि पुष्य योग क्या है?
रवि पुष्य योग तब बनता है जब पुष्य नक्षत्र रविवार — रवि (सूर्य) के दिन — को पड़ता है। पुष्य को 27 नक्षत्रों में सर्वाधिक शुभ माना जाता है, और सूर्य के अपने वार के साथ इसका संयोग इस योग को विशेष प्रबल बनाता है। यह योग उतनी देर रहता है जितनी देर उस दिन दोनों साथ रहें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के रविवार के साथ पुष्य नक्षत्र का समान भाग।
यह किसके लिए शुभ है
रवि पुष्य नए आरंभ, स्वर्ण एवं संपत्ति क्रय, कार्य आरंभ, निवेश तथा अनुबंध हेतु अत्यंत प्रिय है। इस समय आरंभ किए कार्य एवं क्रय समृद्ध माने जाते हैं। सभी पुष्य समयों की भाँति, विवाह परंपरागत रूप से टाला जाता है।
समय कैसे तय होता है
पुष्य नक्षत्र सर्वत्र एक ही क्षण आरंभ एवं समाप्त होता है, पर रविवार का "दिन" आपके स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक मापा जाता है — अतः सटीक समय आपके स्थान पर निर्भर करता है। समय सही हों, इसके लिए ऊपर अपना नगर चुनें।
गुरु पुष्य
जब पुष्य गुरुवार (गुरु, बृहस्पति के दिन) को पड़ता है, तो निकट-संबंधी गुरु पुष्य योग बनता है — समान रूप से शुभ, विशेषतः धन एवं विद्या हेतु।