वैदिक ज्योतिष में राशियाँ
वैदिक ज्योतिष में राशिचक्र को 30° की बारह समान राशियों में बाँटा गया है, जिन्हें राशि कहते हैं। ये मेष से मीन तक चलती हैं और प्रत्येक कुंडली का आधार हैं — आपके लग्न की राशि, चंद्रमा की राशि (आपकी राशि) और प्रत्येक ग्रह की राशि आपके व्यक्तित्व, मन एवं भाग्य को आकार देती हैं।
पाश्चात्य ज्योतिष ऋतुओं से जुड़े सायन राशिचक्र का प्रयोग करता है, जबकि वैदिक ज्योतिष स्थिर तारों से जुड़े निरयन राशिचक्र का। इस अंतर (अयनांश, आज लगभग 24°) के कारण आपकी वैदिक राशि प्रायः आपकी परिचित पाश्चात्य राशि से एक पहले वाली होती है। वैदिक ज्योतिष सूर्य राशि नहीं, चंद्र राशि को सर्वाधिक महत्व देता है।
एक दृष्टि में 12 राशियाँ
राशि को क्या परिभाषित करता है — तत्व, गुण एवं स्वामी
प्रत्येक राशि के तीन लक्षण उसका स्वभाव तय करते हैं:
- तत्व — अग्नि, पृथ्वी, वायु या जल। अग्नि राशियाँ ऊर्जावान एवं महत्वाकांक्षी, पृथ्वी राशियाँ व्यावहारिक एवं स्थिर, वायु राशियाँ बौद्धिक एवं सामाजिक, जल राशियाँ भावुक एवं अंतर्ज्ञानी होती हैं।
- गुण — चर, स्थिर या द्विस्वभाव। चर राशियाँ आरंभ करती हैं, स्थिर राशियाँ टिकाती हैं, द्विस्वभाव राशियाँ अनुकूलन करती हैं।
- स्वामी ग्रह — प्रत्येक राशि का एक स्वामी ग्रह होता है (जैसे मंगल मेष एवं वृश्चिक का, शुक्र वृषभ एवं तुला का)। स्वामी का बल एवं स्थिति राशि की अभिव्यक्ति को रंग देते हैं।
सूर्य राशि, चंद्र राशि एवं लग्न — 'आपकी' राशि कौन-सी?
अधिकांश लोग अपनी सूर्य राशि जानते हैं, पर वैदिक ज्योतिष में चंद्र राशि प्रमुख है — यह मन एवं भावनाओं की स्वामिनी है तथा दशा, गोचर एवं अधिकांश फलादेश इसी से होते हैं। लग्न, जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उदित राशि, शरीर, जीवन-दिशा एवं समस्त भाव-व्यवस्था तय करता है।
चंद्रमा किसी राशि में लगभग सवा दो दिन रहता है, अतः अपनी वास्तविक राशि जानने हेतु सटीक जन्म तिथि, समय एवं स्थान आवश्यक है। तीनों — लग्न, चंद्र राशि एवं प्रत्येक ग्रह की राशि — देखने हेतु अपनी निःशुल्क कुंडली बनाएँ।
राशियाँ, भाव एवं नक्षत्र
प्रत्येक राशि 27 नक्षत्रों (13°20' के सूक्ष्म भाग) के अंशों में भी फैली होती है और नौ ग्रहों में से किसी एक के स्वामित्व में होती है। राशि को उसके स्वामी, उसमें स्थित ग्रहों एवं उसके नक्षत्रों सहित पढ़ना ही सामान्य स्वभाव-सूची को व्यक्तिगत फलादेश में बदलता है।